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मुसलमानों ने भुलाया अपनी जिंदगी का मकसद: मौलाना अल कदर

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 26 2017 12:42AM IST
मुसलमानों ने भुलाया अपनी जिंदगी का मकसद: मौलाना अल कदर

भोपाल में शनिवार को सुबह 70वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा आगाज में फजिर की नमाज के बाद मौलाना अल कदर साहब के बयान के साथ हुआ। 

ईंटखेड़ी-घासीपुरा में लाखों जमातियों के मजमे को खिताब करते हुए मौलाना ने फरमाया कि अल्लाह ने हमें किसी न किसी काम के लिए पहुंचाया है। उस काम से हम भटक गए हैं। 

उन्होंने हदीस और कुरआन रोशनी में नसीहत की कि अल्लाह के हुक्म और पैगम्बर साहब के बताए रास्ते पर चलें।

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उन्होंने कहा कि दुनिया में हर चीज का मकसद है। अल्लाह ने जो आसमान बनाया उसका मकसद है, अल्लाह ने जो पहाड़ों को बनाया उसका भी अपना मकसद, समुंदर, नदियां और पानी को बनाने का भी मकसद है। 

मखलूक को पैदा किया उसका भी मकसद है, लेकिन सब तो अपने काम में लगे हुए हैं, सिर्फ मुसलमान अपना मकसद भूल गए हैं। 

उन्होंने इस दौरान पैगम्बर हजरत नूह अलैहिस्सलाम से लेकर हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम तक का किस्सा अपने बयान में सुनाया। इसके बाद जोहर की नमाज और इंशा की नमाज के बाद मौलाना साद साहब ने बयान किया। 

उन्होंने लोगों से मुखातिब होते हुए कहा कि दीन खुद के अमल करने का नाम नहीं, बल्कि दूसरों को दावत देना भी दीन है। उन्होंने ईमान, नमाज पर बयान किया। बयान के बाद इशां की नमाज अदा की गई।

- पहले दिन ही टूटा रिकार्ड

सत्तरवें आलमी तब्लीगी इज्तिमा के पहले दिन ही इज्तिमा का पुराना रिकार्ड टूट गया। पहले दिन ही लाखों की तादाद में लोग पहुंचे, हालात यह हो गई कि पंडाल खचाखच भर गया। 

जबकि अभी इज्तिमा में लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी है, तकरीबन पूरी रात यह सिलसिला चलता रहा और दुआ के दिन तक इज्तिमा पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा। अब तक यहां करीब पांच लाख लोगों के जुटने का अनुमान है।

- पहले दिन हुए 500 निकाह

इज्तिमागह पर असिर की नमाज के बाद निकाह हुए। दिल्ली मरकज से आए मौलाना साद साहब ने निकाह का खुत्बा पढ़ाया। 

यह पहला मौका है, जब इज्तिमागाह पर पहले दिन निकाह पढ़ाए गए हैं। पूर्व में इज्तिमा के दूसरे दिन निकाह पढ़ाए जाते थे।

- वॉलिटियर्स ने संभाला ट्रेफिक

यातायात पुलिस के करीब ढाई हजार जवानों के साथ तब्लीगी जमाअत के तकरीबन तीन हजार बॉलिटियर्स यातायात व्यवस्था को बनाने में लगे हैं। 

यातायात व्यवस्था का आलम यह है कि लाखों लोगों के इज्तिमा पहुंचने के बाद भी ट्रेफिक जाम के हालात नहीं बन रहे हैं। 

करोंद से र्इंटखेड़ी तक दुकानों को सड़क किनारे लगाया गया है, जिससे यातायात में दिक्कत नहीं हो। वॉलिटियर्स का यह जज़्बा देख पुलिस भी उनसे सबक ले रही है।

- विदेशी मेहमानों के लिए अलग इंतजाम

इज्तिमा पहुंचने वाली विदेशी जमाअतों के लिए अलग इंतजाम किए गए हैं। जिससे की वह इज्तिमा में सुकून के साथ दीन की बातें सुन और समझ सकें। 

उनके लिए विभिन्न भाषाओं के ट्रांसलेटर इन कैम्पों में नियुक्त किए गए हैं, जो बयान को विदेशी मुल्कों की जुबान में ट्रांसलेट करके विदेशियों को समझाते हैं।

- खिदमत के लिए लगे कैम्प

राजधानी में खिदमत के लिए जगह-जगह कैम्प लगाए गए हैं। भोपाल रेलवे स्टेशन, हबीबगंज रेलवे स्टेशन, नादरा बस स्टेंड, भोपाल टाकीज, प्रभात चौराहा से इज्तिमागाह पर जाने वालों के लिए खिदमती कैम्प लगाए गए हैं। 

स्टेशन पर उतरते ही पहले इज्तिमा यात्रियों का इस्तकबाल किया जाता है। इसके बाद उन्हें कैम्प में लाकर चाय पिलाई जाती है, फिर ट्रक, बस,जीप और अन्य साधनों से उन्हें इज्तिमा स्थल तक पहुंचाया जा रहा है।

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muslims forgotten the purpose of their lives

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