Breaking News
Top

व्यापम घोटालाः घोटाले की जांच में लगे 20 अधिकारियों का CBI ने किया तबादला

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Mar 11 2018 11:57AM IST
व्यापम घोटालाः घोटाले की जांच में लगे 20 अधिकारियों का CBI ने किया तबादला

सीबीआई ने व्यापम घोटाले की जांच के लिए बनी विशेष व्यापम जांच शाखा से अपने 20 अधिकारियों को वापस बुला लिया है। CBI ने यह फैसला उस समय लिया है जब व्यापम घोटाले से जुड़े 50 मामलों की जांच होनी बाकी थी।

इन सभी अधिकारियों का दिल्ली स्थित एंटी-करपशन शाखा में तबादला कर दिया गया है। आपको बता दें कि सीबीआई ने वर्ष 2016 में व्यापम ब्रांच को स्थापित किया था जिसमें 100 से अधिक अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। इनमें डीआजी, एएसपी,डीएसपी एंव इंस्पेक्टर रेंक के अधिकारी शामिल थे।
 
सूत्रों के मुताबिक पिछले 6 महिनों में 70 प्रतिशत से अधिक अधिकारियों को यहां से हटा दिया गया है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि व्यापम घोटाले को लेकर हमने बड़ी उम्मीदों के साथ इसकी सीबीआई जांच की मांग की थी। लेकिन जांच में अधिकत्तर आरोपियों को क्लीन चीट दिए जाने से जांच खत्म हो गई है। 
 
 
हालांकि सीबीआई की दलील है कि 50 में से 40 मामलों की जांच अपनी शीर्ष स्तर पर हैं। इसके इलावा 100 से अधिक मामलों में,आरोपियों के खिलाफ़ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और जांच जारी हैं। कुछ अधिकारियों का तबादला एक रुटीन प्रक्रिया के तहत किया गया है। यहां पर भोपाल व्यापम ब्रांच को बंद किए जाने का कोई कारण नहीं है। 
 
आपको बता दें कि सीबीआई ने 13 जुलाई 2015 को मध्यप्रदेश स्पेशल टॅास्क फोर्स(STF) से व्यापाम घोटाले की जांच अपने हाथ में ली थी उस समय मुख्य विपक्षी पार्टी और मामलें को उजागर करने वालो को इस मामले में सीबीआई के द्वारा तेज कार्रवाई करने की उम्मीद थी। शुरुआत में सीबीआई प्रमुख ने इस मामलें को लेकर 40 सदस्यों की एक टीम नियुक्त की थी। कुछ अधिकारयों का मानना है कि व्यापम घोटले की जड़ तक पहुंचने में दो दशकों से अधिक का समय भी लग सकता हैं। 
 

जाने व्यापम घोटाले का बारे में 

व्यापमं भर्ती घोटाला मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा भर्ती घोटाला माना जाता है, इस घोटाले कई बड़े नाम सामने आए जिनमें कुछ लोग तो सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। दरअसल मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल का काम मेडिकल टेस्ट जैसे पीएमटी प्रवेश परीक्षा, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा व शैक्षिक स्तर पर बेरोजगार युवकों के लिए भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन कराना है।
 
व्यापमं घोटाले में सरकारी नौकरी में 1000 फर्जी भर्तियां और मेडिकल कॉलेज में 514 फर्जी भर्तियों का शक है। खुद सीएम शिवराज सिंह विधानसभा में स्वीकार कर चुके हैं कि 1000 फर्जी भर्तियां की गईं। व्यापमं घोटाले का खुलासा 2013 में तब हुआ, जब पुलिस ने एमबीबीएस की भर्ती परीक्षा में बैठे कुछ फर्जी छात्रों को गिरफ्तार किया, ये छात्र दूसरे छात्रों के नाम पर परीक्षा दे रहे थे।
 
 
बाद में पता चला कि प्रदेश में सालों से एक बड़ा रैकेट चल रहा है, जो फर्जीवाड़ा कर छात्रों को एमबीबीएस में इसी तरह एडमिशन दिलाता है। छात्रों से पूछताछ के दौरान डॉ. जगदीश सागर का नाम सामने आया, सागर को पीएमटी घोटाले का सरगना बताया गया। जगदीश सागर पर आरोप है कि वो पैसे लेकर फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेजों में छात्रों का एडमिशन करवाता था, जिससे उसने करोड़ों की संपत्ति बनाई।
 
सागर से पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह इतना बड़ा नेटवर्क है, जिसमें मंत्री से लेकर अधिकारी और दलालों का पूरा गिरोह काम कर रहा है। पूछताछ में यह सामने आया कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं का ऑफिस इस काले धंधे का अहम अड्डा था। सागर ने पूछताछ में बताया कि परिवहन विभाग में कंडक्टर पद के लिए 5 से 7 लाख, फूड इंस्पेक्टर के लिए 25 से 30 लाख और सब इंस्पेक्टर की भर्ती के लिए 15 से 22 लाख रुपये लेकर फर्जी तरीके से नौकरियां बांटी जा रही थीं। लक्ष्मीकांत शर्मा तक पहुंचने में जगदीश सागर की गवाही ने अहम भूमिका निभाई।

ADS

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )
cbi transffer 20 official from vyapam scam

-Tags:#Cbi#Vyapam Scam#Madhya Pradesh#CM Shivraj Singh Chauhan

ADS

ADS

मुख्य खबरें

ADS

ADS

ADS

ADS

Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo