Hari Bhoomi Logo
शनिवार, सितम्बर 23, 2017  
Top

बुखार में फायदेमंद होते हैं आदिवासियों के नुस्खे

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 30 2017 10:13AM IST
बुखार में फायदेमंद होते हैं आदिवासियों के नुस्खे

मौसम के बदलाव के चलते अक्सर बुखार जैसी समस्या का हो जाना आम बात है। बुखार नियंत्रण के लिए आदिवासी अंचलों में कई नुस्खों को हर्बल जानकारों द्वारा प्रचलन में लाया जाता रहा है।

कई वनस्पतियों और उनके अंगों को बुखार नियंत्रण के लिए अत्यंत कारगर माना गया है। हर्बल जानकार जिन्हें मध्य भारत में भुमका और पश्चिम भारत में भगत कहा जाता है, अनेक वनस्पतियों का उपयोग कर बुखार में आराम दिलाने का दावा करते हैं।

चलिए जानते हैं इन्हीं आदिवासियों के द्वारा अपनाए जाने वाले 10 चुनिंदा हर्बल नुस्खों को जिनका इस्तेमाल कर बुखार पर काबू पाया जा सकता है।

इनमें से अधिकांश हर्बल नुस्खों की पैरवी आधुनिक विज्ञान भी करता है।

1. पातालकोट के आदिवासी बुखार और कमजोरी से राहत दिलाने के लिए कुटकी के दाने, हर्रा, आंवला और अमलतास के फलों की समान मात्रा लेकर कुचलते है और इसे पानी में उबालते है, इसमें लगभग 5 मिली शहद भी डाल दिया जाता है और ठंडा होने पर इसे रोगी को दिया जाता है। दिन में कम से कम दो बार इस मिश्रण को दिए जाने पर बुखार नियंत्रित हो जाता है।

2. इन्द्रजव की छाल और गुड़ुची का तना समान मात्रा में लेकर काढ़ा बनाया जाए और लम्बे चले आ रहे बुखार के रोगी को दिया जाए तो आराम मिल जाता है। पातालकोट के आदिवासी रात को इन्द्रजव पेड़ की छाल को पानी में डूबोकर रख देते है और सुबह इस पानी को पी लेते है, इनके अनुसार इससे पुराना बुखार ठीक हो जाता है।

3. पातालकोट में आदिवासी करौंदा की जड़ों को पानी के साथ कुचलकर बुखार होने पर शरीर पर लेपित करते है और गर्मियों में लू लगने और बुखार आने होने पर इसके फलों का जूस तैयार कर पिलाया जाता है, तुरंत आराम मिलता है।

4. शरीर में बुखार होने की वजह से जलन होने पर पलाश के पत्तों का रस लगाने से जलन का असर कम हो जाता है।

5. पुर्ननवा की जड़ो को दूध में उबालकर पिलाने से बुखार में तुरंत आराम मिलता है। बुखार के दौरान अल्पमूत्रता और मूत्र में जलन की शिकायत से छुटकारा पाने के लिए भी यही मिश्रण कारगर होता है।

6. डांग- गुजरात के आदिवासी फराशबीन की फल्लियों को पीसकर या कद्दूकस पर घिसकर मोटे कपड़े से इसका रस छान लेते है और इस रस को कमजोर शरीर और बुखार से ग्रस्त रोगियों के देते है। उनके अनुसार इसमें पोषक तत्व की भरपूर मात्रा होती है और ये कमजोरी को दूर भगाने में कारगर फॉर्मूला है।

7. सप्तपर्णी की छाल का काढ़ा पिलाने से बदन दर्द और बुखार में आराम मिलता है। डांग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार जुकाम और बुखार होने पर सप्तपर्णी की छाल, गुड़ुची का तना और नीम की आंतरिक छाल की समान मात्रा को कुचलकर काढ़ा बनाया जाए और रोगी को दिया जाए तो अतिशीघ्र आराम मिलता है। आधुनिक विज्ञान भी इसकी छाल से प्राप्त डीटेइन और डीटेमिन जैसे रसायनों को क्विनाईन से बेहतर मानता है।

8. सूरजमुखी की पत्तियों का रस निकाल कर मलेरिया आदि में बुखार आने पर शरीर पर लेपित किया जाता है, पातालकोट के आदिवासियों का मानना है कि यह रस शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है।

9. डांग गुजरात के आदिवासी सोनापाठा की लकड़ी का छोटा सा प्याला बनाते है और रात को इसमें पानी रख लेते है, इस पानी को अगली सुबह उस रोगी को देते है जो लगातार बुखार से ग्रस्त है।

10. डांग गुजरात के आदिवासी हंसपदी के संपूर्ण अंगों यानि तना, पत्ती, जड़, फल और फूल लेकर सुखा लेते है और फिर एक साथ चूर्ण तैयार करते है, इस चूर्ण का चुटकी भर भाग शहद के साथ सुबह और शाम लेते है जिससे बुखार में आराम मिलता है।

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )
tribal home remedies for control fever

-Tags:#Home Remedies For Fever
मुख्य खबरें
Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo