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इस वजह से सोते समय ही आते हैं खर्राटे, जानें इसे रोकने के तरीके

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Mar 14 2018 3:33PM IST
इस वजह से सोते समय ही आते हैं खर्राटे, जानें इसे रोकने के तरीके

खर्राटे या खर्राटा, ये शब्द सुनते ही जरूर आपको कोई ऐसा व्यक्ति याद आ गया होगा, जो सोते वक्त खर्राटा लेता है। आसपास अगर कोई भी व्यक्ति अगर खर्राटे ले रहा होता है, तो उसे सुनकर काफी गुस्सा आता है। साथ ही लोग परेशान और इरीटेट भी होते हैं।

दरअसल, खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को खुद नहीं पता होता कि वह खर्राटे ले रहा है, जब तक कोई दूसरा व्यक्ति उसे न बताए। कई बार खर्राटे लेना बीमारी के रूप में साबित हो सकता है, जिसे स्लीप एपनिया कहा जाता है। 

लेकिन क्या आपको पता है कि व्यक्ति को सोते समय ही खर्राटा क्यों आता है, अगर नहीं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह के लोगों को और किन कारणों से खर्राटे आते हैं।

सांस में अवरोध

सांस के रास्ते में अवरोध आना, खर्राटे आने की मेन वजह मानी गई है। शरीर में जब कार्बनडाइ ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और ऑक्सीजन की कमी होती है, तो शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति करने के समय सांस के रास्ते में अवरोध आता है, जो खर्राटे का कारण बनता है।

गले का पिछला हिस्सा संकरा होना

जब किसी व्यक्ति के गले का पिछला हिस्सा संकरा होता है, तो इस कारण वह खर्राटे लेता है। इस तरह के व्यक्ति को खर्राटे की समस्या जन्म से होती है। गले का पिछला हिस्सा संकरा होने के कारण जब ऑक्सीजन उस रास्ते से होकर गुजरती है, तो आसपास के ऊतक कंपित होते हैं, जिसके कारण खर्राटे आने लगते हैं।

छोटी गर्दन

छोटी गर्दन वाले व्यक्तियों में भी खर्राटे की समस्या आम है। अगर किसी व्यक्ति की गर्दन आम लोगों से छोटी है, तो खर्राटे आते हैं।

निचले जबड़े का छोटा होना

अगर किसी व्यक्ति का नीचला जबड़ा छोटा होता है, तो भी भी खर्राटे आते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब जबड़ा छोटा होता है, तो लेटने के समय जीभ पीछे की ओर हो जाती है और सांस लेने में दिक्कत होती है।

अगली स्लाइड्स में जानें खर्राटे लेने के और कारण व इससे बचने के उपाय...


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