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सीमा पर शुरू हुआ खतरनाक आतंकियों का जमावड़ा, घाटी में बढ़ सकती है हिंसा

कविता जोशी/ नई दिल्ली | UPDATED Sep 22 2017 9:41AM IST
सीमा पर शुरू हुआ खतरनाक आतंकियों का जमावड़ा, घाटी में बढ़ सकती है हिंसा

जम्मू-कश्मीर में आने वाले कुछ समय के दौरान आतंकी हिंसा में इजाफा देखने को मिलेगा। इसमें भारत-पाक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के उस पार पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बैठे आतंकी संगठनों के आतंकवादी अहम भूमिका निभाएंगे। 

राज्य में सक्रिय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी किए गए हालिया अलर्ट में भी कहा गया है कि इसमें वह आतंकी शामिल हैं। जो काफी पहले से राज्य में सक्रिय हैं और कुछ के द्वारा हाल ही में एलओसी से घुसपैठ करने में सफलता हासिल की गई है। 

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यह आतंकी सैन्य-सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले के अलावा सुरक्षाबलों के काफिलों के मूवमेंट और उनकी पृथक पोस्टों को निशाना बना सकते हैं। हिंसा का यह क्रम आगामी नवंबर महीने के अंत तक जारी रहने का अनुमान लगाया गया है। 

इसी समय पर एलओसी से लेकर आईबी तक पाक सेना द्वारा संघर्षविराम तोड़कर आतंकियों को घुसपैठ कराने की घटनाओं में भी इजाफा देखे जाने के तथ्य का भी सुरक्षा एजेंसियां खुलासा कर रही हैं।     

हिटलिस्ट में 19 आतंकी

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि जम्मू-कश्मीर में तैनात सेना व अन्य सुरक्षाबलों ने इस आतंकी हिंसा के दौर से निपटने के लिए एक विशेष फुलप्रूफ प्लान तैयार किया है। 

इसमें कुल 19 आतंकवादियों का सफाया करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें जैश-ए-मोहम्मद के 15 आतंकी और हिजबुल मुजाहिद्दीन के 2, लश्करे तैयबा का 1 और अलकायदा का 1 आतंकी शामिल है। 

घुसपैठ के जरिए नियंत्रण रेखा लांघने वाले जैश के 15 आतंकियों में से 3 को सुरक्षाबलों ने बीते 26 अगस्त को उस वक्त मार गिराया था। 

जब उन्होंने दक्षिण-कश्मीर के पुलवामा स्थित जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के बड़े पुलिस कांप्लेक्स पर फिदायीन हमला किया था। लेकिन जैश ने हाल ही में सूबे के 2 स्थानीय आतंकियों को अपने संगठन में भर्ती कर अपनी ताकत में इजाफा कर लिया है। 

इसके अलावा सुरक्षाबलों को इनके घाटी में सक्रिय कमांडर खालिद की भी जानकारी हाथ लगी है। पुलवामा में पुलिस कांप्लेक्स पर हुए फिदायीन हमले में खालिद का हाथ होने के पुख्ता प्रमाण भी मिलने लगे हैं।

इन कारणों का पड़ेगा प्रभाव 

सेना के एक अधिकारी ने कहा कि आतंकी हिंसा की घटनाओं में इजाफा होने के पीछे राज्य के ऊपरी इलाकों में बर्फ पड़ने की शुरूआत होना और निचले इलाकों में सेब की खेती से जुड़ा काम पूरा होने को बड़ी वजह माना जा रहा है। 

क्योंकि बर्फ पड़ने से घाटी में मौजूद आतंकियों को पीओके से समय-समय पर मिलने वाली रसद व आर्थिक मदद में कमी आने लगती है। साथ ही आतंकी संगठनों को घुसपैठ के जरिए मिलने वाले नए आतंकियों की संख्या भी घटने लगती है। 

ऐसे में राज्य में पूरी बर्फ पड़ने से पहले ही पीओके में मौजूद आतंकियों के आकाओं ने अपने गुर्गों को सूबे की शांति भंग करने का खुला पैगाम जारी कर दिया है। 

अभी एलओसी के करीब गुरेज के इलाकों में बर्फ पड़नी शुरू हो गई है। धीरे-धीरे यह नीचे की ओर मच्छल, केरन, नौगाम से लेकर समूचे सूबे में फैल जाएगी। 

दूसरी ओर सेब की खेती से जुड़ा काम घाटी में लगभग खत्म होने के कगार पर है। इसकी आड़ में अब तक खामोश बैठे आतंकियों के पास अब बाहर निकलकर आतंक फैलाने के अपने नापाक मंसूबा को पूरा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।  

यह हैं खूंखार पांच कमांडर

घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों के जिन पांच प्रमुख खुंखार आतंकियों की सुरक्षाबलों को तलाश है। 

उसमें अलकायदा का कमांडर जाकिर मूसा, हिजबुल मुजाहिद्दीन का चीफ रियाज नाइकू, हिजबुल का भावी चीफ कहलाने वाला सद्दाम पादर, लश्करे तैयबा की चीफ बनने की कतार में सबसे आगे खड़ा जीनत-उल-इस्लाम और जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर खालिद शामिल है। 

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violence could increase in jammu kashmir as terrorists begins mobilize

-Tags:#Jammu & Kashmir News#Terrorist Attack#LoC#POK#Security Agency
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