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नहीं बन पाएगा पॉवर प्‍लांट! गोरखपुर परमाणु संयंत्र को नहीं मि‍ल रहा पानी

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फतेहाबाद. गोरखपुर गांव में बनने वाला देश का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र शुरू से ही विवादों में रहा है। 2800 मैगावाट वाले परमाणु संयंत्र के लिए शुरू में किसान उपजाऊ जमीनें देने को तैयार नहीं थे। दो साल के संघर्ष के बाद किसान राजी हुए और जनवरी 2014 में निवर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परमाणु संयंत्र का शिलान्यास किया। अब संयंत्र के लिए पानी की सप्लाई सबसे बड़ी बाधा बन रही है। संयंत्र के लिए 320 क्यूसेक पानी की जरूरत है। संयंत्र के अफसरों का कहना है कि सरकार से एग्रीमेंट हुआ है तो पानी तो देना ही होगा, जबकि सिंचाई विभाग के अधिकारी पानी के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। एनपीसीआईएल 320 क्यूसेक पानी की मांग कर रहा है, जबकि सिंचाई विभाग 180 क्यूसेक पानी ही दे रहा है। 
 
1503 एकड़ भूमि का अधिग्रहण
परमाणु संयंत्र के लिए सरकार ने 1503 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया है। इसमें गोरखपुर गांव की 1313 एकड़ 5 कनाल, काजलहेड़ी गांव की 4 एकड़ 3 कनाल व बड़ोपल गांव की 185 एकड़ 3 कनाल जमीन है। 
 
किसान शुरू से ही विरोध में
गोरखपुर में परमाणु संयंत्र लगाने के लिए 29 जुलाई 2010 को सेक्शन-4 के तहत अधिसूचना जारी की गई थी। इसके विरोध में किसानों ने 17 अगस्त 2010 से लघु सचिवालय के बाहर धरना शुरू कर दिया था, जोकि सितम्बर 2012 तक चला। किसानों द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ जारी आंदोलन के चलते दो किसानों की मौत भी हो चुकी है।
 
नीचे की स्‍लाइड्स में जानि‍ए, प्रोजेक्‍ट से जुड़े अहम तथ्‍य और क्‍या कहते हैं अधि‍कारी- 
 
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-Tags:#गोरखपुर#पॉवर प्‍लांट#बि‍जली#पानी
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