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Movie Review: आजादी का राग अलापती 'राग देश'

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 28 2017 9:37PM IST
Movie Review: आजादी का राग अलापती 'राग देश'

हिंदी सिनेमा के बेहतरीन डायरेक्टर्स में से एक तिग्मांशु धूलिया हर बार एक लगा जॉनर की कहानी को बड़े परदे पर उतारते हैं। इस बार भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है। आइये जानते हैं कैसी है ये फिल्म और दर्शकों को क्यों देखनी चाहिए....

देशभक्ति से सराबोर फिल्म रागदेश 1945 में आजाद हिंद फौज और ब्रिटिश शासन के वक्त की कहानी को दर्शाती है।इस फिल्म की कहानी भारतीय सेना के तीन ऐसे जवानों की है जिन पर देशद्रोह का आरोप लगता है और उनकी मदद के लिए एक बीमार वकील (भुलाबाई देसाई) आगे आते हैं। 

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फिल्म में इन तीन जवानों का किरदार की भूमिका कुणाल कपूर, अमित साध और मोहित मारवा ने निभाई है। फिल्म की कहानी को इस तरह दर्शाया गया है कि दर्शक भूल के भी एक सीन मिस नहीं करना चाहेगा। इस फिल्म की कसी हुई कहानी के पीछे रिसर्च और राइटिंग टीम की कड़ी मेहनत साफ दिखती है।

फिल्म में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की नीतियों और आजाद हिंद फौज की कार्य प्रणाली को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। अगर एक्टिंग की बात करें तो कुणाल कपूर, अमित साध और मोहित मारवाह ने अपने अभिनय को लोहा मनवा लिया है।

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फिल्म में एक ही गाना है ‘कदम कदम बढाए जा’, जिसके अंतरों को सीन के अनुसार अलग-अलग वक्त पर प्रेजेंट किया गया है। अगर फिल्म के निगेटिव प्वॉइंट की बात करें तो इसकी एडिटिंग में थोड़ी जर्क नजर आते हैं। वहीं लाइटिंग और बैकग्राउंड म्यूजिक को अच्छे से प्रेजेंट किया गया है।

अगर आप लीक से हटकर कुछ देखने के शौकीन हैं और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की नीतियों और आजाद हिंद फौज की कार्य प्रणाली को जानना चाहते हैं तो इस फिल्म को देख सकते हैं।

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-Tags:#Raag Desh#Tigmanshu Dhulia#Movie Review
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