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फिल्म रिव्यू: देसी-रंगीन और धांसू है नवाजुद्दीन की 'बाबूमोशाय बंदूकबाज'

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 25 2017 10:55AM IST
फिल्म रिव्यू: देसी-रंगीन और धांसू है नवाजुद्दीन की 'बाबूमोशाय बंदूकबाज'

अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ रिलीज के एक दिन पहले ही लीक हो गई थी। जिसके कारण नवाज और उनके फिल्म मेकर्स को तगड़ा नुकसान हो सकता है। बहरहाल आज से सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज हो गई है।

गैग्स अ़ॉफ वासेपुर से लेकर मुन्ना माइकल तक नवाजुद्दीन ने खुद को बेहतरीन अभिनेता के साथ-साथ डार्क हीरो के रुप में भी साबित कर दिया है।

नवाजुद्दीन की फिल्मों का दर्शकों को इंतजार रहता है। बाबूमोशाय का ट्रेलर और गाने इसकी कहानी कह गए हैं। फिल्म का गाना “पोस्टमैन हैं हम तो भैया, मौत की चिट्टी लाते हैं।” नवाज के किरादर को बताता है। नवाजुद्दीन फिल्म में एक शूटर का किरदार निभा रहे हैं।

ये सिर्फ और सिर्फ नवाजुद्दीन की फिल्म है वह इसमें साइड एक्टर नहीं बल्कि हीरो हैं। बाबूमोशाय को ‘ए’ सर्टिफिकेट मिला है जिसका मतलब सीधा है कि इसे बस 18 से नीचे की उम्र के लोग न देखने जाए।

कहानी-

कहानी बाबू बिहारी बने नवाजुद्दीन की है। जिसके लिए किसी को भी मौत के घाट उतारना ही उसका पेशा है। बाबू 10 साल की उम्र से ही हत्याएं करने का काम कर रहा है। फिल्म में उनकी मालकिन और लेडी डॉन सुमित्रा का किरदार दिव्या दत्ता निभा रही हैं। बाबू 'जीजी' के लिए काम करता है लेकिन वह मनमौजी है और किसी की सुनता नहीं है। मौत का खेल खलने वाले बाबू की जिदंगी रंगीन है। एक कॉन्ट्रेक्ट के दौरान बाबू की मुलाकात फुलवा (बिदिता) से होती है और दोनों को इश्क हो जाता है। बाबू और फुलवा का प्रेम कहानी बोल्ड और रंगीन दिखाई गई है।

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