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बलात्कार के झूठे आरोप में फंसे पुरूषों को बचाने के लिए बने कानून: कोर्ट

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 31 2017 3:28PM IST
बलात्कार के झूठे आरोप में फंसे पुरूषों को बचाने के लिए बने कानून: कोर्ट

दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि रेप के झूठे आरोपों का सामना कर रहे पुरुषों की सुरक्षा और उनकी प्रतिष्ठा के लिए भी कानून बनाया जाए। आज के समय में हर कोई केवल महिलाओं की गरिमा बचाने के लिए ही लड़ रहा है। लेकिन झूठे केस में फंसे उन पुरिषों की गरिमा और आत्म सम्मान का क्या। 

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निवेदिता अनिल शर्मा ने रेप केस के एक आरोपी को बरी करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए जो कानून बने हैं, उनमें से कुछ का दुरूपयोग हो रहा है।

कोई भी झूठे केस में फंसे किसी पुरूष के सम्मान और गरिमा की बात नहीं करता। साथ ही अदालत ने उस व्यक्ति को बरी कर दिया जिस पर 18 सितंबर 1997 को रेप का आरोप लगा था। गंवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपी पर रेप इल्जाम न साबित होने के चलते कोर्ट ने फैसला सुनाया। इस केस में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वह जब घर में अकेली थी तो आरोपी उसके घर आया और अकेले देख उसके साथ दुष्कर्म किया।

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अदालत का कहना है कि झूठे केस में न सिर्फ आरोपी सम्मान और गरिमा को बहाल करना बल्कि अपमान के नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए अगर वह चाहे तो अपने इस नुकसान के लिए वह मामला दर्ज करा सकता है।

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court acquits rape accused says no one discusses men dignity and honour

-Tags:#Delhi Court#Fake Cases#Crime News
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