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मेट्रो किराए में वृद्धि को लेकर लोगों ने जताया रोष, बताया सरकारों की नौटंकी

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 11 2017 1:16AM IST
मेट्रो किराए में वृद्धि को लेकर लोगों ने जताया रोष, बताया सरकारों की नौटंकी

पांच महीनों में दूसरी बार मेट्रो का किराया बढ़ने का लगभग हर वर्ग ने विरोध किया है। मेट्रो यात्रियों ने मांग की है कि किराया घटाया जाना चाहिए, नहीं तो आम लोग परेशान हो जाएंगे।

एफएम रैनबो रेडियो के मशहूर रेडियो जॉकी मनीष आजाद का कहना है कि वह खुद मेट्रो यात्री है। किराया वाकई ज्यादा बढ़ा है जिसका सबसे अधिक असर गरीब तथा छात्र वर्ग पर पड़ा है।

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मेट्रो में केंद्र व दिल्ली सरकार दोनों बराबर की भागीदार हैं। बावजूद इस मामले को बैठकर सुलझाने के बजाय खुद उलझे रहे।

मेट्रो के पास अन्य बहुत से संसाधन है, जिनसे आय अर्जित की जा सकती है। किराया बढ़ाना ही अंतिम रास्ता नहीं हो सकता। अच्छा हो अगर लोगों को इस बढ़ोत्तरी से राहत दी जा सके।

पेशे से प्रोपर्टी का कारोबार करने वाले विनोद कुमार बिन्नू का कहना है कि मेट्रो हो या अन्य सार्वजनिक वाहन प्रणाली, इनसे अगर लाभ कमाने का लक्ष्य रखा जाएगा तो शायद यह सही नहीं है।

भारत में आज भी आधी से अधिक आबादी सार्वजनिक वाहनों से यात्रा पर निर्भर है। दिल्ली मेट्रो राजधानी में हर वर्ग की पसंद बनी हुई।

केजरीवाल सरकार कह रही है कि केंद्र ने जबरन किराया बढ़ाया यह संभव ही नहीं है, क्योंकि दोनों बराबर की भागीदार है। मेट्रो चलाने के लिए किराया बढ़ाना जरूरी मानते है लेकिन एक साल में 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ोत्तरी को अन्याय ही कहा जा सकता है।

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समाज सेवी एमएल भास्कर का कहना है कि केजरीवाल सरकार केवल लोगों को गुमराह कर रही है। आज गरीब आदमी एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए सस्ते साधन की तलाश में है।

जबकि डीटीसी लगभग समाप्त होने के कगार पर है। ऐसे में मेट्रो काफी हद तक सहयोग करती है लेकिन एक साल में दो बार किराया बढ़ोत्तरी ने गरीबों का दम निकाल दिया है।

संगीतकार सिंकदर का कहना है कि देशभर में अगर मेट्रो की मांग बढ़ रही है तो जाहिर है कि सुख सुविधा व अन्य मामलों में कुछ अलग है। दिल्ली मेट्रो में लाखों यात्री रोज सफर करते है, इनमें सबसे ज्यादा संख्या वेतनभोगी वर्ग की है।

यह वर्ग अधिक किराया वहन नहीं कर सकता, इनकी अनदेखी किसी को भी नहीं करनी चाहिए। किराया बढने के बाद लगभग 1500-2000 तक जेब का बोझ बढ़ गया है ऐसे में सरकारों को इनके बारे में सोचना चाहिए।

सेल्समैन हरीप्रकाश किराया बढ़ोत्तरी से आहत है। इनका कहना है कि सेलरी कम और किराया ज्यादा बढ़ गया है। मेट्रो से कंपनी आना जाना सस्ता पड़ता था लेकिन अब लगभग दो डबल पड़ेगा, इसलिए मेट्रो को छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।

वेतन में सिर्फ 800 रूपए बढ़े है, जबकि पांच माह में किराया लगभग 1200 से अधिक बढ़ गया है। समझ नहीं आ रहा कि नौकरी छोड़ दू या मेट्रो से सफर करना।

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public exhibition of increase in delhi metro fares

-Tags:#Delhi News#Delhi Metro
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