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जीएसटी से खून में नहीं आया उबाल, नहीं बढ़ी कीमतें

हरिभूमि ब्यूरो/ रायपुर | UPDATED Nov 25 2017 2:17AM IST
जीएसटी से खून में नहीं आया उबाल, नहीं बढ़ी कीमतें

जीएसटी के दायरे में आने से खून के रेट में 12 फीसदी उबाल नहीं आया है। नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन द्वारा तीन साल पहले निर्धारित रेट पर ही ब्लड की जांच होती है।

ड्रग डिपार्टमेंट के अफसरों ने साफ किया कि मार्च 2014 से सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में एक यूनिट यानी 350 एमएल ब्लड डोनेट करने की सरकारी ब्लड बैंक में 400 रुपए फीस निर्धारित है, जबकि सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज से प्राइवेट ब्लड बैंक में 1050 रुपए लिया जाता है।

वहीं प्राइवेट अस्पताल के मरीज से 1450 रुपए फीस ली जाती है। ये पैसे सिर्फ ब्लड डोनेट से पहले जांच में लगने वाले उपकरण और टेस्ट के होते हैं। वर्तमान में इसी रेट पर ब्लड डोनेशन की फीस ली जाती है। अफसरों का दावा है कि जीएसटी के बाद ब्लड डोनेट की फीस नहीं बढ़ी है।

दरअसल सप्ताहभर से सोशल मीडिया पर खबरें प्रसारित हो रही हैं कि ब्लड डोनेशन के रेट में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसे लेकर मरीजों में भ्रम की स्थिति बनी है। ब्लड बैंक पर डोनेशन के समय फीस को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है, लेकिन हरिभूमि की पड़ताल में साफ हो गया कि जीएसटी का प्रभाव ब्लड डोनेशन पर नहीं पड़ा।

दो तरह के ब्लड बैग

दो ब्लड बैग होते हैं। एक 350 एमएल का और दूसरा 450 एमएल का। जिनका वजन 55 किलो से कम है, उनसे 350 एमएल ब्लड ही लेते हैं। बाकी से 450 एमएल ब्लड लिया जाता है।

वॉलेंटरी ब्लड डोनेशन कर आप तीन जिंदगियां बचाते हैं, क्योंकि आपके ब्लड में प्लैटलेट्स, आरबीसी और प्लाज्मा होते हैं, जो तीन लोगों के काम आते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

ब्लड बैंक से पैसे देकर ब्लड नहीं लिया जा सकता। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेशनल डोनर्स को 1998 में बैन कर दिया था। अब ब्लड के बदले ब्लड ही लिया जा सकता है। मजबूरी में बगैर डोनर के भी स्वैच्छिक संस्थाएं ब्लड देती हैं। उनके पास अच्छा स्टॉक और ब्लड देने वाले लोगों का डेटा बैंक होता है।

डोनेशन का यह है प्रोसेस

लैब में ब्लड डोनेट करते वक्त डोनर को एक फॉर्म दिया जाता है, जिस पर उसकी मेडिकल हिस्ट्री से बहुत-से सवाल होते हैं। डोनर को इसमें सही जानकारी भरनी चाहिए। यह ब्लड लेने और देने वाले दोनों की सेफ्टी के लिए जरूरी है।

यह भी बताएं कि कौन-कौन सी दवाएं ले रहे हैं। ब्लड प्रेशर या हॉर्मोन की दवा ले रहे हैं, तो ब्लड नहीं दे सकते। इसी तरह एंटी-बायोटिक का कोर्स खत्म किए 3 दिन और डिस्प्रिन लिए 2 दिन जरूर होने चाहिए।

क्रोसिन के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है। फॉर्म जमा करने के बाद मरीज का वजन, पल्स, ब्लड प्रेशर आदि चेक किया जाता है। सब सही है, तो हीमोग्लोबिन टेस्ट के लिए ब्लड लेते हैं।

अगर हीमोग्लोबिन 12.5 से ज्यादा है, तो डोनर को बेड पर लिटाकर ब्लड निकालने के लिए सिरींज लगा देते हैं। एक बैग भरने में आमतौर पर 5-7 मिनट लगते हैं।

डोनर के ब्लड की होती है जांच

लैब अफसरों के मुताबिक डोनर से जो फीस ली जाती है, उसमें हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, एचआईवी, सिफलिस और मलेरिया जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले किट की होती है।

न बीमारियों में से किसी एक के भी लक्षण पाए जाने पर डोनर का ब्लड नहीं लिया जाता और उसे बीमारी की जानकारी दी जाती है।

यह कर सकता है डोनेट

जानकारी के मुताबिक ऐसे लोग जिनकी उम्र 18 से 65 साल के बीच हो और वजन 45 किलो या ज्यादा हो। अगर हाईट 5.5 फीट से ज्यादा है, तो वजन 55 किलो या ज्यादा होना चाहिए।

45 किलो वालों से 3.5 एमएल ब्लड ही लिया जाता है।  हीमोग्लोबिन 12.5 या ज्यादा है, तभी डोनेट किया जाएगा।

नहीं बढ़ा रेट

नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन द्वारा 2014 में रेट निर्धारित किया गया था, उसी रेट पर ब्ल्ड डोनेशन किया जाता है। जीएसटी लागू होने के बाद रेट में बढ़ोतरी नहीं की गई।

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