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गुंडों ने दी ऐसी धमकी, बुर्का पहनकर कोर्ट में पहुंचा गवाह

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 11 2017 3:30AM IST
गुंडों ने दी ऐसी धमकी, बुर्का पहनकर कोर्ट में पहुंचा गवाह

राजधानी के एक चर्चित हत्याकांड के चश्मदीद गवाह को आरोपियों की ओर से जान से मारने की धमकी दी गई। गवाह से सीधा कहा गया कि यदि खिलाफ में गवाही दी, तो गोली मार देंगे।

डरा हुआ गवाह बुर्के में कोर्ट पहुंचा। गवाह ने कोर्ट को आरोपियों की करतूतों को बताया। गवाह की गुहार सुन सेवंथ एडीजे भानुप्रताप त्यागी ने एसपी को निर्देश देकर उन्हें रक्षा प्रदान करने को कहा है।

विडंबना है कि जान जोखिम में डालकर गवाह कोर्ट पहुंचा, लेकिन जेल प्रशासन आरोपी को लेकर कोर्ट नहीं आया और गवाही टल गई।

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डीडीनगर रोहिणीपुरम निवासी आकाश तिवारी की 17 जून 2016 को हत्या हो गई थी। इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी अभिषेक दीवान जेल में है। दोनो का प्रापर्टी का काम था और दोनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई थी।

इसमें एक आरोपी संजय नगर निवासी महमूद रजा जमानत पर जेल से बाहर है। इस मामले के चश्मदीद पीयूष शुक्ला की मंगलवार को गवाही दी थी। गवाह को मिल रही धमकी से वह इतनी दहशत में है कि मंगलवार को कोर्ट में बुर्का पहनकर पहुंचा।

गवाह ने कोर्ट में बताया, आरोपियों की ओर से उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। सरेआम गोली मारने की बात कही जा रही है। गवाह की बातों को कोर्ट ने गंभीरता से लिया और कोर्ट ने एसपी को निर्देशित कर गवाह की सुरक्षा सुनिश्चित कर विधिक कार्रवाई करने को कहा।

आरोपी को लेकर नहीं आई पुलिस

गवाह निर्धारित समय पर सुबह करीब साढ़े 11 बजे पहुंच गया था और दोपहर बाद शाम तक बैठा रहा, लेकिन आरोपी को न पुलिस लेकर आई अौर न ही जेल प्रशासन कोर्ट लेकर आया।

इस संवेदनशील मामले में भी पुलिस ने तत्परता नहीं दिखाई। पुलिस की यह करतूत गवाह के मन में संदेह पैदा कर रही है। इस मामले से यह भी पता चला कि सच के लिए गवाही देना कितना मुश्किल है।

इस प्रकार गवाह का आज का पूरा समय बर्बाद हुआ और गवाही भी नहीं हो पाई। अब गवाही अगली तिथि को होगी। इससे गवाह के लिए मुश्किलें और भी बढ़ जाएंगी।

कहता है कानून

सीआरपीसी की धारा 195 क में धमकी इत्यादि के मामले में साक्षियों के लिए प्रक्रिया दी गई है। इसमें बताया गया है कि यदि साक्षियों को कोई किसी प्रकार की धमकी देता है, तो गवाह उसके खिलाफ परिवाद दायर कर सकता है। इसमें कोर्ट स्वयं संज्ञान में लेकर कार्रवाई कर सकती है।

वहीं आईपीसी की धारा 195 क यह कहती कि आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के आशय से गवाह को धमकाना या प्रलोभन देना एक अजमानतीय अपराध है।

इसके तहत 7 साल तक की सजा प्रावधान है। चाहे वह आरोपी को फंसाने के लिए किया गया हो या फिर छुड़ाने के लिए।

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-Tags:#Chhattisgarh#Crime News

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