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दूध बंद होते ही गायों को छोड़ दिया जाता है आवारा, पढ़िए तीन साल की चौंकाने वाली रिपोर्ट

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 22 2017 4:08PM IST
दूध बंद होते ही गायों को छोड़ दिया जाता है आवारा, पढ़िए तीन साल की चौंकाने वाली रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ की कुछ गोशालाओं में भूखी गायों की मौत के मामले सामने आने के साथ ही प्रदेश में गायों की हालत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गोशालाओं करोड़ों रुपए का अनुदान देने के बाद भी शहरों की सड़कों और गांव-खेतों में गायों की बेतहाशा भीड़ बढ़ रही हैं।

इसे लेकर कामधेनु विश्वविद्यालय ने तीन साल की मेहनत के बाद प्रदेश में देशी गायों की स्थिति पर एक बड़ी रिपोर्ट तैयार की है।

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इस रिपोर्ट से यह तथ्य सामने आया है कि पशुपालक गायों को तब तक पर्याप्त चारा-दाना देते हैं, जब तक वह दूध देती है। दूध बंद होने के साथ ही गायों को खुले में आवारा घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है। गायों की बदहाली की सबसे बड़ी वजह आर्थिक है।

दरअसल देशी गाय जितना दूध देती हैं उसकी कीमत के मुकाबले चारे की कीमत अधिक है, ऐसे में गायों को पालना अब फायदे का सौदा नहीं रह गया है।

कामधेनु विश्वविद्यालय ने प्रदेश में गायों की हालत पर जो रिसर्च किया है, वह केंद्र सरकार के उपक्रम आईसीएआर के लिए तैयार की गई है। हाल ही में यह रिपोर्ट पूरी होने के बाद इसे जारी किया गया है।

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यह रिपोर्ट विश्वविद्यालय के अधिकारी डॉ. असित जैन, डॉ.दीप्ती किरन बारवा, डॉ.मोहन सिंह,डॉ. के मुखर्जी, डॉ. तृप्ति जैन, डॉ. केएन राजा, डॉ. एमएस टांटिया, व डॉ. अरजव शर्मा ने तैयार की है।

2014 में यह रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरु हुई, तीन साल तक लगातार जांच, पड़ताल व अनुसंधान के बाद हाल में यह रिपोर्ट एक दस्तावेज के रूप में सामने आई। रिपोर्ट में 30 बिंदुओं के आधार पर गाय पालन से जुड़े सभी पहलुओं का अध्यन किया गया है।

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three years of research report on cows condition

-Tags:#Cow#Cow Killing
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