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रायपुर: 20 हजार का हैकिंग सॉफ्टवेयर, मिनटों में बनते है सैंकड़ो टिकट

हरिभूमि न्यूज/ रायपुर | UPDATED Sep 29 2017 1:00AM IST
रायपुर: 20 हजार का हैकिंग सॉफ्टवेयर, मिनटों में बनते है सैंकड़ो टिकट

सॉफ्टवेयर के जरिए रेलवे की वेबसाइट में सेंध मारकर टिकटों की बुकिंग ने रेल महकमे को हिलाकर रख दिया है। हैकिंग के जरिए टिकट बुकिंग के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन पहली बार सॉफ्टवेयर से किसी खास ट्रेन के टिकट बुक करने के मामले से रेलवे के सायबर एक्सपर्ट्स भी चकित हैं।

अब रेलवे की जांच का फोकस हावड़ा मुंबई मेल के सिस्टम पर होगा। इस बीच हरिभूमि की पड़ताल में यह जानकारी सामने आई कि मुंबई दिल्ली जैसे शहरों में हैकिंग के अवैध सॉफ्टवेयर बड़ी आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।

ऑनलाइन भी महज 20 से 50 हजार में कई तरह के सॉफ्टवेयर मिल रहे हैं। भिलाई में टिकटों की बुकिंग के लिए प्रयोग होने वाला सॉफ्टवेयर भी मुंबई से लाया गया था।

पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि अवैध ढंग से बिकने वाले सॉफ्टवेयर में मिनटों में टिकटों की बुकिंग के साथ सिस्टम चलाने में होने वाली परेशानियों को दूर करने का दावा भी किया जाता है।

इसी की मदद से मिनटों में सैकड़ों टिकट बुक होते हैं और यात्रियों के हिस्से में वेटिंग टिकटें ही आती हैं। भिलाई में पकड़ा गया कैफे संचालक भी मुंबई से इसी तरह का सॉफ्टवेयर लाकर टिकटों की बुकिंग किया करता था।

अब जांच टीम इसका पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि रेलवे की वेबसाइट से किस तरह दलाल ने सिर्फ हावड़ा मुंबई मेल के सिस्टम को हैक किया, जबकि कोलकाता से संचालित क्रिश के जिस सिस्टम से हैकिंग की जा रही थी, उसमें सैकड़ों ट्रेनों की बुकिंग होती है।

ऐसे हाेता था टिकट बुक

टिकटों की बुकिंग के लिए सिस्टम को हैक करने के साथ ही आरोपी ने आईआरसीटीसी की कई आईडी भी बना ली थी। इसे एक से अधिक बैंकों से लिंक कर अलग-अलग आईडी से टिकटों की बुकिंग किया करता था, जिससे किसी को शक न हो।

क्राइम ब्रांच ने जब सभी आईपी एड्रेस की जांच की, तब इसकी पुष्टि हुई कि यहां से लगातार कंफर्म टिकटों की बुकिंग की जा रही है।

जांच नेटवर्क की भी

रेलवे की जांच टीम को जानकारी मिली है कि देश के कई शहरों में कुछ लोग सुनियोजित नेटवर्क बनाकर टिकटों की बुकिंग करते हैं। पहले तो ये ऑफलाइन मोड में यात्री के टिकट की जानकारी अपलोड करते हैं।

इसके बाद सर्वर जैसे ही शुरू होता है, उसे हैक कर एक साथ टिकटें बुक हो जाती हैं। इसी प्रक्रिया से नेटवर्क के लोग मनचाही ट्रेन के टिकट एक दूसरे से बनवा लेते हैं।

मिलीभगत के बगैर संभव नहीं

सायबर एक्सपर्ट्स का कहना है, रेलवे की वेबसाइट बेहद सुरक्षित मानी जाती है। इसे हैक करने के लिए जिन लोगों द्वारा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, उनमें वे लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने रेलवे की वेबसाइट को डेवलप किया है। इतना ही नहीं, विजिलेंस और लगातार निगरानी के बावजूद हैकिंग की घटना ने रेलवे के संबंधित अफसरों को भी संदेह के दायरे में ला दिया है।

जांच जारी

सॉफ्टवेयर हैकिंग मामले में आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया है। हावड़ा मुंबई के सिस्टम को आरोपी ने किस तरह हैक किया, इस संबंध में जांच की जा रही है।

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rail tickets booked by hacking software in raipur

-Tags:#Hacking Software#Railway Website#Train Ticket#Cyber Experts
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