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पेट्रोल-डीजल और शराब जल्द ही जीएसटी के दायरे में आएंगे: अमर अग्रवाल

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 10 2017 12:23AM IST
पेट्रोल-डीजल और शराब जल्द ही जीएसटी के दायरे में आएंगे: अमर अग्रवाल

प्रदेश के वाणिज्यिक कर मंत्री और जीएसटी काउंसिल के सदस्य अमर अग्रवाल का कहना है, पेट्रोल और डीजल देर सवेर जीएसटी के दायरे में आएंगे। इसके और एल्कोहल को लेकर सारे राज्यों में सहमति नहीं थी, इसलिए इन्हें अभी इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

सभी राज्यों को सहमत करने के प्रयास हो रहे हैं। एक राय बनते ही इन्हें जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा। जीएसटी में निरंतर बदलाव होंगे।

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पत्रकारों से चर्चा करते हुए श्री अग्रवाल ने कहा, तीन माह के अनुभव के बाद छोटे उद्योगों की परेशानी को देखते हुए जीएसटी में बदलाव किए गए हैं। आगे भी ऐसा लगातार होगा।

आने वाले समय में जो सुझाव सामने आएंगे, उन्हें भी काउंसिल के सामने रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जीएसटी काउंसिल की जिस बैठक में बदलाव करने के प्रस्ताव पारित किए गए, उस बैठक में तीन और सुझाव आए थे।

इनमें कंपोजिशन वालों को अपना माल एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजने वाली परेशानी के साथ इन्हें इनपुट का लाभ न मिलने और रेस्टोरेंट के स्लैब को लेकर सुझाव आए हैं।

इनमें बदलाव के लिए पांच सदस्यों की समिति बनाई गई है। श्री अग्रवाल ने बताया, इस समिति में वे भी हैं। इन सुझावों पर व्यापक रिपोर्ट बनाकर काउंसिल में प्रस्तुत की जाएगी, इसके बाद फैसला होगा।

राज्यों में एक राय नहीं थी

श्री अग्रवाल ने बताया कि पेट्रोल-डीजल के साथ एल्कोहल को लेकर राज्यों में सहमति न होने के कारण इन्हें जीएसटी के दायरे से अभी बाहर रखा गया है।

लेकिन आज नहीं तो कल, इन्हें जीएसटी के दायरे में जरूर लाया जाएगा। इसके लिए प्रयास हो रहे हैं। जिस दिन सारे राज्यों में एक राय हो जाएगी, उस दिन ही इन्हें जीएसटी में शामिल कर लिया जाएगा।

दूसरे राज्यों से कम है वैट

छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने के बारे में उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ में पहले ही दूसरे राज्यों से वैट बहुत कम है। उन्होंने कहा, मप्र में ही पेट्रोल 71 रुपए है। श्री अग्रवाल ने कहा, पहले दूसरे राज्य हमारे राज्य के बराबर तो आ जाएं, इसके बाद यहां वैट कम करने पर विचार किया जाएगा।

कांग्रेस भी तो सारे फैसलों में शामिल

श्री अग्रवाल ने इस बात को गलत बताया कि कांग्रेस के समय में जीएसटी का स्लैब 18 फीसदी तक ही था। उन्होंने कहा, वे प्रारंभ से ही जीएसटी काउंसिल में रहे हैं।

उन्होंने बताया, कांग्रेस शासनकाल में जब सभी राज्यों का औसत निकाला गया था, तो 21 प्रतिशत आया था। आज जो न्यूट्रल औसत है, वह 18 प्रतिशत है। तीन प्रतिशत इसलिए कम किया गया, क्योंकि तीन प्रतिशत की पूर्ति क्षतिपूर्ति से कर रहे हैं।

जीएसटी काउंसिल में सारे राज्यों के वित्त या वाणिज्यिक कर मंत्री शामिल हैं। इनमें कांग्रेस के राज्यों के मंत्री भी हैं। काउंसिल का हर फैसला सभी की सहमति से हो रहा है, इसमें कांग्रेस के लोग भी शामिल हैं।

फ्लाइऐश ब्रिक्स की समस्या भी दूर कराएंगे

श्री अग्रवाल ने कहा कि फ्लाइऐश ब्रिक्स को लेकर भी स्लैब की समस्या सामने आई है। इसे भी दूर कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने बताया कि फर्शी पत्थर को लेकर समस्या सामने आई थी, उसका समाधान कर दिया गया है।

उन्होंने कहा, जीएसटी को लेकर तीन माह में यह बताना संभव नहीं है कि राज्यों को कितने राजस्व की हानि हुई है। उन्होंने कहा, सिर्फ इतना बता सकते हैं कि ग्रोथ का 14 फीसदी नुकसान हुआ है।

उन्होंने जीएसटी में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वित्तमंत्री अरुण जेटली का आभार जताया।

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petrol diesel and alcohol will soon come under the purview of gst

-Tags:#Chhattisgarh News#GST#Amar Agarwal
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