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बाघ संरक्षण के नाम पर पिकनिक मना रहे है वन अधिकारी

haribhoomi.com | UPDATED Jan 4 2014 9:46AM IST
जगदलपुर. नए साल पर सैर सपाटा कौन नहीं करना चाहता, लेकिन अगर सैर फ्री में करने को मिले तो मजा ही आ जाए। ऐसा ही कुछ कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के वन विभाग के अधिकारी। नए साल पर जगदलपुर में वन विभाग के अधिकारी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। बाघ संरक्षण के लिए जगदलपुर पहुंचे वन अधिकारियों के दल ने माचकोट रेस्टहाउस में जमकर पिकनिक मनाई। दो दिवसीय इस पिकनिक का औपचारिक शुभारंभ वन विद्यालय के सभागार में किया गया। विभाग की ओर से इस गुपचुप आयोजन का सारा लब्बो लुआब खाने व पीने तक ही सीमित होकर रह गया। 
 
बस्तर में बाघ का नामोनिशान मिटे दशक भर से ज्यादा हो गया। यहां तक कि वाइल्ड लाइफ की कई रिपोर्ट व गतिविधियों तक में यहां बाघ तो दूर उसके पगचिन्ह व मल तक नहीं देखे जा रहे हैं। इसके बावजूद यहां बाघ संरक्षण की कवायद के नाम पर सिर्फ व सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। विभाग के रिकार्ड में यह दर्ज है कि माओवादी गतिविधियों के चलते वन्य प्राणियों की गणना करना कई वर्षों से बंद है। इसके बावजूद बाघ संरक्षण के लिए सेमीनार का आयोजन करना फिजूलखर्ची ज्यादा साबित हो रहा है।
 
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नीचे की स्लाइड्स में जाने वास्तव में क्यों होते हैं ये सेमिनार- 
officals on picnic reasoning seminar to undrastan how to conserve lions
-Tags:#बस्तर#बाघ संरक्षण#पिकनिक#जगदलपुर
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