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दवा मिलने से पहले ही यहां आ जाती है मौत, आज भी पचास साल पीछे है जगदलपुर

haribhoomi.com | UPDATED Dec 27 2013 7:53AM IST
जगदलपुर. कहने को ते हमारी सरकार भारत निर्माण की बात करती है, गांव- गांव तरक्की की बाते बखारती फिरती है लेकिन सच्चाई ठीक इसके उल्ट है। गावों, जंगलों में रहने वाले आदिवासियों की पहुंच से स्वास्थ्य सेवाएं आज भी उतनी ही दूर हैं जितना वे 50 या 100 साल पहले थीं। तब भी इनका इलाज बैगा ही करते थे और आज भी बैगा ही इनका भगवान है।
 
जगदलपुर के निरीह लोग छोटी छोटी बीमारियों से दम तोड़ देते हैं। बस्तर की 32 लाख आबादी पर केवल 80 डॉक्टर ही तैनात हैं जबकि स्वीकृति 279 डाक्टरों की है। लेकिन बस्तर आने के लिए डॉक्टर तैयार ही नहीं हैं। संवेदनशील क्षेत्रों के जिला अस्पतालों में भी नाम मात्र के ही डॉक्टर और अन्य स्टाफ से काम चल रहा है। बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से घायल मरीजों और नक्सल घटना में घायल जवानों को जगदलपुर के महारानी अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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