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नक्सलियों की करतूत, पहाड़ से गिराई 1000 साल पुरानी गणेश प्रतिमा

haribhoomi.com | UPDATED Jan 28 2017 9:55AM IST
दंतेवाड़ा. ढोलकाल की 2500 फीट ऊंची पहाड़ियों पर स्थापित 1000 साल पुरानी ऐतिहासिक व दुर्लभ गणेश प्रतिमा पहाड़ी से गिरी और उसके कई टुकड़े हो गए। इस ऐतिहासिक धरोहर के खंडित होने की वजह क्या है, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है, माओवादियों ने अपनी राह आसान करने के लिए प्रतिमा खंडित की है, जबकि कुछ ग्रामीणों का दावा है कि इस इलाके में दो दिन पूर्व हेलीकाफ्टर को उड़ाने भरते उन्होंने देखा था। 
 
 
ढोलकाल पहाड़ी दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर है। इस जगह को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां का सबसे बड़ा आकर्षण खुले में 2500 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर विराजित यही प्रतिमा ही थी। नक्सल प्रभावित इस इलाके में प्रतिमा की वजह से ही पर्यटकों का आना-जाना शुरू हुआ था। 
 
छिंदक नागवंशी काल की ढाई फीट की इस मूर्ति के गायब होने का मामला 26 जनवरी को खुला। वहां दर्शनार्थ पहुंचे लोगों को मूर्ति गायब मिली। उसके बाद सोशल मीडिया में इसका हल्ला मचा और प्रशासन के लोग भागे-भागे वहां पहुंचे। रेस्क्यू टीम भी पहुंची। खोजबीन के दौरान प्रतिमा पहाड़ी से 100 फीट नीचे कई टुकड़ों में बरामद हुई। 
 
पुलिस का कहना है, प्रतिमा अपने आप नहीं गिरी है। इसे माआवादियों ने गिराया है। इधर, ग्रामीणों का कहना है , दो दिन पूर्व पहाड़ियों पर हेलीकॉप्टर को मंडराते हुए देखा गया था। 
 
 
कलेक्टर सौरभ कुमार ने कहा कि पुरातत्व विभाग से मूर्ति की कीमत का आंकलन कराया जाएगा। ग्राम सभा होने के बाद इस मूर्ति पर फैसला लिया जाएगा। जवानों ने निकाले मूर्ति के टुकड़े मूर्ति गायब होने के बाद पुलिस प्रशासन दल-बल के साथ खोजबीन में जुटा रहा। लगभग दो घंटे बाद सैकड़ों की संख्या में पहुंचे जवानों ने पहाड़ी से नीचे 100 फीट की गहराई में मूर्ति के टुकड़ों को खोजा। 
 
क्या है ढोलकाल 
बीहड़ जंगलों को चीरने के बाद 2500 फीट की उंचाई पर 10वीं शताब्दी के छिंदक नागवंशी काल की गणेश प्रतिमा यहां स्थापित थी। ग्रामीणों की पहल के बाद ये प्रतिमा लोगों की नजर में आई। इसके बाद मीडिया की नजर पड़ी और प्रशासन ने पर्यटन स्थ्ल बनाए जाने का दावा किया।
 
माओवादियों ने तोड़ी प्रतिमा: एसपी 
पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप ने कहा कि यह इलाका संवेदनशील है। पहुंच मार्ग बनने के बाद लोगों का आना जाना काफी होता, जिससे माओवादियों को काफी परेशानी होती। यही वजह है कि माओवादियों ने गणेश की प्रतिमा को खंडित कर दिया। 
 
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