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605 साल में पहली बार बस्तर दशहरे के रथ से हादसा, एक की मौत

haribhoomi.com | UPDATED Oct 5 2014 5:57AM IST
जगदलपुर. हरेली अमावस्या से शुरू होकर 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में शनिवार को भीतर रैनी रस्म के दौरान बड़ा हादसा हो गया। रथ चोरी कर कुम्हड़ाकोट ले जाने के दौरान दो ग्रामीण चक्के के नीचे आ गए, जिसमें एक ग्रामीण की मौत हो गई जबकि एक को गंभीरावस्था में महारानी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बस्तर दशहरे के 605 वर्षों के इतिहास में जनहानि की यह पहली घटना है। 
 
ज्ञात हो कि वनांचल में बस्तर दशहरा का उल्लास बिखरा हुआ है। इस पर्व के तहत काछनगादी, जोगी बिठाई, रथ परिक्रमा, निशा जात्रा, मावली परघाव, बाहर रैनी, भीतर रैनी, और मुरिया दरबार प्रमुख आकर्षण होता है। शनिवार को माली परघाव व भीतर रैनी की रस्म थी। रात 10.30 बजे के करीब भीतर रैनी रस्म के दौरान रथ को दंतेश्वरी मंदिर से चुराकर कुम्हड़ाकोट ले जाने वक्त मिताली चौक स्थित हनुमान मंदिर के पास यह बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में लोहंडीगुड़ा ब्लाक के मिचनार निवासी बुधरू पिता मिट्ठू 50 टन वजनी दो मंजिला रथ के चक्कों के नीचे आ गया। रथ बुधरू को रौंदता हुआ आगे बढ़ गया। इस दौरान एक और ग्रामीण घायल हो गया। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही 8शेष पेज 7 पर
 
घटना स्थल पहुंची तहसीलदार यामिनी पांडेय गुप्ता ने घायलों को तत्काल जगदलपुर के महारानी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान बुधरू की की मौत हो गई। एक गंभीर घायल कहां का रहने वाला है इसकी जानकारी नहीं मिली है। अस्पताल में बुधरू की मौत की पुष्टि हास्पिटल चौकी प्रभारी सत्यभान सिंह ठाकुर ने की है।
 
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, एसपी ने संभाला मोर्चा और 800 वृक्षों से बनता है रथ -  
 
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