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छत्तीसगढ़: नौ दिवसीय मेले में आकर्षण का केंद्र रहा बांस से बना ताजमहल और बांसुरी

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 10 2017 3:10AM IST
छत्तीसगढ़: नौ दिवसीय मेले में आकर्षण का केंद्र रहा बांस से बना ताजमहल और बांसुरी

फेस्टिव सीजन को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की ओर से नौ दिवसीय बांस आधारित हस्तशिल्प मेले का आयोजन देवेन्द्र नगर स्थित पंडरी हाट में किया गया है।

इसमें बिलासपुर, नारायणपुर, मोल्लामानपुर, अबुजमार्ग से आए बांस कलाकरों ने हस्तशिल्प बांस का कलश, टेबल, कुर्सी, झालर, झूमर, हैंगिंग लाइट्स, ताजमहल, टी-कॉफी ट्रे,टेंपल, हैंर्ग्स, बांसुरी जैसे आर्टिकल्स प्रदर्शित किए है।

बांस से निर्मित ताजमहल के बारें बिलासपुर से आए कलाकार नंदकिशोर साखरे बताते हैं कि यहां प्रदर्शित सभी कलाकृतियां हमारे दिमाग की उपज होती है।

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यदि एक कलाकार टीवी में ताजमहल देख ले तो वो ताज महल बनाने की कोशिश करेगा, इसी तरह हमने भी ताजमहल, लक्ष्मण झूले, राममंदिर की एक छोटा-सा आर्ट यहां पेश किया है।

असम के बॉइलिंग बांस से निर्मित ताजमहल ये ताज महल बॉलिंग बांस का बना हुआ है इस बांस की खासबात ये है कि ये असम में पैदा होता है, और ये लंबाई के साथ सॉफ्ट भी होता है कि कारण इसे आकार देना आसान हो जाता है।

ये बांस साधारण बांस से पांच गुना ज्यादा महंगा होता है। नंदकिशोर आगे बताते हैं कि इस ताज महल को तैयार करने में दो से तीन दिन का समय लगा ये एक ही बांस से बनाया गया है, इसे अट्रेक्टिव लुक देने के लिए ऑइल और पेंट का यूज किया जाता है।

पानी बांस से बनी बांसुरी.. बांसुरी का नाम सुनते ही आपके दिमाग में कृष्ण की मूर्त बन गई होगी, लेकिन ये बांसूरी कृष्ण की बांसूरी से बहुत ही अलग है। ये बांसूरी केवल छत्तीसगढ़ी ट्राइबल एरिया में ही देखने को मिलेगी।

इसकी खासबात ये है कि ये मुंह से नहीं बल्कि हाथ से घूमाकर बजाई जाती है, जब इस आप घूमाएंगे तब इसमें से एक बांसूरीनुमा आवाज निकलेगी। ये बांसूरी एक लंबे बांस की तरह दिखाई देती है इसे अकसर चरवाहे जंगल में लेकर घूमा करते हैं।

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ऑरिजनल तूमा यानी लौकी से बना नाइट-लैंप-- इस प्रदर्शनी में ऑरिजनल तूमा यानी लौकी से बने नाइट लैंप भी प्रदर्शित किए गए हैं, इनमें खासबात ये है कि पहले लौकी के पकने का छ: से आठ महीने तक इंतजार किया जाता है।

जब तूमा पूरी तरह से पक जाती है तब उसके अंदर से बिजनिकालकर उसे खाली कर लिया जाता है, और उसके बाद उसे कम आंच पर पकाया जाता है। इसके बाद उसमें ट्राइबल आर्ट की आकृतियां उकेर कर छोटे-छोटे छिद्र कर उसमें लाइट लगाई जाती है।

बांस की बनी झालर-- अकसर हमारे यहां चीनी सामानों का बहिष्कार करने की मांग उठती है लेकिन इसी के साथ विकल्प की बात भी होती है इसी बात को ध्यान में रखकर छत्तीसगढ़ी कलाकारों ने इस दिवाली बांस से बनी अट्रेक्टिव डिजाइन झालर भी एग्जीबिशन में पेश की है।

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-Tags:#Chhattisgarh News#9Day Handicrafts Fair
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