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इन वजहों से एचआर मैनेजमेंट काे माना जाता है ब्राइट कैरियर ऑप्शन, जानें कोर्स से जुड़ी सारी बातें

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Dec 7 2017 4:25AM IST
इन वजहों से एचआर मैनेजमेंट काे माना जाता है ब्राइट कैरियर ऑप्शन, जानें कोर्स से जुड़ी सारी बातें

एचआर मैनेजमेंट में करियर के प्रति युवाओं में खास तरह का आकर्षण देखा जा रहा है। अगर आप में टीम लीडर बनने की काबिलियत है तो एचआर यानी ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट की फील्ड में शानदार करियर का आगाज कर सकते हैं। इस फील्ड में सैलरी पैकेज भी बेहतरीन है मिलता है। इस में कैसे संवार सकते हैं अपना करियर, जानिए।

किसी भी ऑर्गेनाइजेशन में एचआर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। एचआर प्रोफेशनल किसी ऑर्गेनाइजेशन में एंप्लॉइज और कंपनी के बीच एक कड़ी का काम करते हैं। एंप्लॉइज के बेहतरी और कंपनी की ग्रोथ के बीच बैलेंस बिठाने की जिम्मेदारी भी ह्यूमन रिसोर्स यानी एचआर मैनेजर का होता है।

आज के दौर में ऑर्गेनाइजेशन छोटा हो या बड़ा इनकी जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि एचआर मैनेजर की डिमांड काफी बढ़ी है। आज स्टूडेंट्स के बीच ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट का कोर्स काफी लोकप्रिय है। 

क्वालिफिकेशन एंड कोर्सेस 

देश के बड़े मैनेजमेंट संस्थानों में एचआर मैनेजमेंट का कोर्स उपलब्ध है। एचआर मैनेजमेंट में दो साल का मास्टर डिग्री या डिप्लोमा भी कर सकते हैं। किसी भी सब्जेक्ट से ग्रेजुएट स्टूडेंट्स एचआर मैनेजटमेंट के कोर्स में एंट्री ले सकते हैं। मास्टर लेवल पर यह कोर्स एमएससी डिग्री एचआर मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट, एमबीए स्पेशलाइजेशन इन एचआर और मास्टर ऑफ आर्ट्स इन एचआर में कर सकते हैं।

इस कोर्स में स्टूडेंट को मैनेजमेंट, ह्यूमन रिसोर्स अकाउंटिंग और ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर सिखाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। अगर कोर्स की बात करें, तो देश के प्रमुख बिजनेस स्कूल ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स कराते हैं, जैसे- एमबीए इन ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, मास्टर आॅफ ह्यूमन रिसोर्स एंड ऑर्गेनाइजेशनल डेवलपमेंट, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट।

अगर बड़े इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेना चाहते हैं, तो एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करना होगा। कई संस्थान स्टूडेंट्स को कैट और मैट जैसे एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर एडमिशन देते हैं। यहां मिले नंबरों के आधार पर स्टूडेंट्स को ग्रुप डिस्कशन के लिए बुलाया जाता है, जो इसमें अच्छे नंबर लाते हैं, उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इस तरह हर स्टेप्स पार कर लेने के बाद स्टूडेंट्स को एडमिशन मिलता है। कुछ संस्थान अपने एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर एडमिशन देती है। 

वर्क प्रोफाइल

आज हर कंपनी को अपने स्टाफ को मैनेज करने के लिए सक्षम एचआर मैनेजर की जरूरत होती है। इस लिहाज से एचआरएम ग्रेजुएट्स के लिए काफी सं•ाावनाएं हैं। प्रोफेशनल एंप्लॉइज की जानकारियां जुटाने से लेकर अब एचआर मैनेजर का कार्य रिक्रूटर मैनेजर, कंपेंसेशन मैनेजर, एंप्लॉयर रिलेशन मैनेजर, स्ट्रेटेजिक मैनेजर तक पहुंच गया है।

इन्हें कंपनियों द्वारा एचआर डिपार्टमेंट, एचआर रिक्रूटमेंट, एचआर ऑडिटिंग जैसे कार्यों में लगाया जाता है। एचआर मैनेजर कंपनी के ग्रोथ का प्लान और कंपनी के टारगेट से भी एंप्लॉइज को रूबरू कराते हैं। साथ ही, वर्कप्लेस पर ऐसा माहौल तैयार करते हैं, जिससे एंप्लॉइज मोटिवेट होकर अपना बेहतर आउटपुट कंपनी को दे सके।

इन कार्यों के लिए एचआर मैनेजर के पास लीडरशिप क्वॉलिटी के साथ ही ह्यूमन रिलेशन को समझने की क्षमता होनी चाहिए।

पर्सनल स्किल

ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट में एक्सपर्ट होने के लिए स्टूडेंट में इंटरपर्सनल स्किल्स का होना जरूरी है। लीडरशिप क्वालिटी और टाइम मैनेजमेंट का गुण इस करियर में काफी आगे ले जा सकता है। एचआर स्टाफ को एक टीम के रूप में काम करना होता है। इसके अलावा, आपमें लोगों को साथ जोड़ने की क्षमता होनी चाहिए।

एक टीम के रूप में तमाम लोगों के साथ को ऑर्डिनेट करते हुए उन्हें मिलजुल कर काम करने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। इसके अलावा, टाइम मैनेजमेंट में एक्सपर्ट होना चाहिए। एंप्लॉइज को समझने, उनका विश्वास हासिल करने और रेस्पेक्ट करने की क्वालिटी बहुत जरूरी है। साथ ही, बेहतर कम्युनिकेशन स्किल होना जरूरी है।

सबसे खास बात यह है कि एंप्लॉई को हैंडल करने की काबिलियत के साथ-साथ प्रेशर में काम करने का गुण होना बेहद जरूरी है। ये सारी क्वालिटीज किताबें पढ़कर नहीं आती हैं। इन गुणों को आपको खुद ही डेवलप करना होगा। अगर आपके अंदर ऐसी क्वालिटी नहीं है, तो फिर आप इस फील्ड में बहुत अच्छा नहीं कर सकते।

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जॉब ऑप्शंस 

आज के दौर में वर्क कल्चर में आए बदलाव के वजह से एचआर प्रोफेशनल्स की डिमांड भी काफी बढ़ गई है। मल्टीनेशनल कंपनियों में तो एचआर प्रोफेशनल्स को रिक्रूट किया ही जाता है, अब छोटी कंपनियों में भी इन्हें हायर किया जाने लगा है। कोर्स करने के बाद आप विभिन्न प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों, ट्रेनिंग और डेवलपमेंट कंपनियों, रिक्रूटमेंट कंसल्टेंसी, बैंक और एचआर कंसल्टेंसी में नौकरी पा सकते हैं।

प्राइवेट फील्ड की कंपनियों के साथ-साथ गवर्नमेंट सेक्टर में भी इनकी मांग बढ़ती जा रही है। मेन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेलीकम्युनिकेशन, मेडिकल और रीयल एस्टेट आदि में भी आपके लिए बेहतर ऑप्शंस हैं। अच्छी बात है कि आजकल विदेश में भी एचआर प्रोफेशनल्स की काफी डिमांड है।

आजकल ह्यूमन रिसोर्स आउटसोर्सिंग का क्षेत्र भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। खासकर विदेशी कंपनियां ऐसे काम दूसरे देशों की कंपनियों से कराने लगी हैं। ऐसे में भारत बेहतर विकल्प के तौर पर उभरा है। इसके अलावा, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में भी बेहतर अवसर हैं। आप नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट क्लियर करने के बाद किसी शिक्षण संस्थान से असिस्टेंट प्रोफेसर या रिसर्च एसोसिएट के तौर पर जुड़ सकते हैं।

इस तरह अपनी नॉलेज, एक्सपर्टीज और एक्सपीरियंस के आधार पर आप कोच या मेंटर या काउंसलर के रूप में भी कार्य कर सकते हैं।

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सैलरी पैकेज

कोर्स कंप्लीट करने के बाद बड़े संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट के जरिए भी नौकरी मिल जाती है। शुरुआती दौर में 25 से 40 हजार रुपए प्रतिमाह आसानी से मिल जाता है।

अगर आपकी जॉब मल्टीनेशनल कंपनी में लग जाती है, तो 5 से 7 लाख रुपए का सालाना पैकेज मिल सकता है। इसके बाद एक्सपीरियंस के आधार पर सैलरी बढ़ती जाती है। पब्लिक सेक्टर की कंपनियां भी अच्छी सैलरी मिल जाती है। हालांकि सैलरी आपकी योग्यता और संस्थान पर निरन्तर करती है। 

मेन इंस्टीट्यूट्स एचआर मैनेजमेंट कोर्स के लिए 

  • एक्सएलआरआई, जमशेदपुर
  • टीआईएसएस, मुंबई
  • आईआईएम, विभिन्न केंद्र
  • देवी अहिल्या विवि, इंदौर
  • यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली, दिल्ली
  • बरकतउल्ला विवि, भोपाल
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