Bajrangi Bhaijaan

Sharing Story

2dBzc4 http://www.y7YwKx7Pm6OnyJvolbcwrWdoEnRF29pb.com
Bakwas story
Bakwas story
Bakwas
Bakwas
Bakwas
TEKCHAND KARDA TAKHATPUR DISST-BILASPUR 9893598811
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे देखते ही मेरी ओर देखते हुए रोने लगा. उसका रोना देख मैं रुक गया, मैंरे पूछने पर वो कुछ भी नहीं बता रहा था. पहले तो मैं उसके रोने की वजह समझ न पाया. आस-पास कोई था भी नहीं जिसकी मैं मदद ले सकता. बार-बार अम्मा कहने से मैं इतना तो समझ गया कि वो अपनी मां को तलाश रहा है. अब मेरे लिए मुश्किल ये थी की मैं उस बच्चे को उसके घर या उसकी मां तक कैसे पहुंचाऊं. वो अपना घर बता पाने में नाकाम था. पहले तो मैंने ये तय किया कि अपना काम बाद में करूंगा, पहले इस बच्चे को इसके घर पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि इस बच्चे को किसी गलत हाथ में पड़ने का खतरा भी था, मैंने उस बच्चे को अपनी साइकिल में बिठाया और वापस गांव की ओर मुड़ गया. इस दौरान बच्चा लगातार रो रहा था. जिससे मेरी मुश्किल बढ़ती जा रही थी. मुझे इस बात का भी डर था कि कहीं लोग मुझे ही गलत न समझ लें. हालांकि मैं दूसरे लोगों से बच्चे के बारे में पूछता, उन्हें बच्चे को पहचानने की अपील करता हुआ गांव के एक छोर से दूसरे छोर और छोटी-बड़ी सभी गलियों में घूमता रहा, इतना तो मैं निश्चित था कि बच्चा मेरे ही गांव का है. क्योंकि जब वो मुझे मिला तो वो बच्चा मेरे गांव से ही निकल कर गांव के बाहर की ओर जा रहा था. मुझे ताजुब्ब भी हुआ कि इतनी देर से बच्चा मेरे साथ है. जबकि काफी पहले से वो बच्चा अपने घर से निकला होगा, क्या परिजनों ने उस बच्चे की तलाश शुरू नहीं की होगी. काफी मशक्कत के बाद एक महिला मुझे मिली जो उस बच्चे को पहचानती थी. लेकिन ये बच्चा किसका है वो ये नहीं जानती थी.यहां से मेरा काम आसान हो गया. उस महिला ने इतना तो जरूर पूरे भरोसे के साथ कहा कि ये बच्चा इसी मोहल्ले का है और रोजाना खेलते-खेलते यहां तक आ जाता है. अब मैं और वो महिला साथ में कुछ और लोग उसके घर की तलाश करने लगे थोड़ी देर में हम बच्चे के परिजनों के सामने थे. मैंने देखा कि अभी तक उस बच्चे के परिजन बच्चे के घर में ना होने की बात से अनजान थे. हालांकि बच्चे को अपनी मां मिल गई. बच्चे की मां ने मुझे आर्शीवाद दिए. मुझे भी एक नेक काम करने की खुशी मिली. ABHAY MISHRA FLAT NO - 1266 NEW LIG FLATS NEW KONDLI NEAR RUCHIKA PETROL PUMP MAYUR VIHAR -III DELHI - 96 MOBILE - 09891723770
मैं करीब 15 साल का रहा हूंगा. उस दौरान मैं अपने गांव (इलाहाबाद के पास) में रहता था. एक दिन मैं गांव से बाहर अपनी साइकिल से जा रहा था. गांव से बाहर निकलते ही अचानक मैंने देखा करीब 2 साल का एक बच्चा जा रहा था, जो मुझे दे