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पितृपक्ष: आखिर पितृपक्ष में क्यों सुनते हैं कर्ण की कथा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 11 2017 9:03AM IST
पितृपक्ष: आखिर पितृपक्ष में क्यों सुनते हैं कर्ण की कथा

पितृपक्ष श्राद्ध में यह कथा अधिकांश क्षेत्रों में सुनाई जाती है। इस कथा में महाभारत के दौरान कर्ण की मृत्यु हो गई। जब उनकी आत्मा स्वर्ग में पहुंची तो उन्हें बहुत सारा सोना और गहने दिए गए। कर्ण की आत्मा को कुछ समझ नहीं आया वह तो आहार तलाश रही थी। 

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उन्होंने देवता इंद्र से पूछा कि उन्हें भोजन की जगह सोना और आभूषण क्यों दिया गया। तब देवता इंद्र ने कर्ण को बताया कि उसने जीवित रहते हुए पूरा जीवन सोना दान किया। लेकिन श्राद्ध के दौरान अपने पूर्वजों को कभी भी खाना दान नहीं किया। तब कर्ण ने इंद्र से कहा उन्हें यह मालूम नहीं था कि उनके पूर्वज कौन थे।

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इसलिए वह कभी उन्हें कुछ दान नहीं कर सकें। इस सबके बाद कर्ण को उनकी गलती सुधारने का मौका दिया गया और 16 दिन के लिए पृथ्वी पर वापस भेजा गया। जहां उन्होंने अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनका श्राद्ध कर उन्हें आहार दान किया यानि तर्पण किया।

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