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जानिए क्यों मनाया जाता है मोहर्रम

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 25 2017 5:26PM IST
जानिए क्यों मनाया जाता है मोहर्रम

मोहर्रम इस्लामी साल का पहला महीना है जो चांद के हिसाब से चलता है। इस्लामी साल का यह महीना दुनिया भर के मुस्लिमों के लिए ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।

मुस्लिम समाज में सुन्नी और शिया दोनों मिलकर मोहर्रम मनाते हैं। हालांकि दोनों के तरीकों में फर्क होता है। इस्लाम धर्म में रमजान के बाद मोहर्रम के महीने को दूसरा सबसे पाक महीना माना जाता है।

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क्यों मनाते हैं मोहर्रम

आज से तकरीबन 1400 साल पहले की बात है, सन् 61 हिजरी के मोहर्रम का महीना था, जब हजरत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन को उनके 72 साथियों के साथ बहुत बेदर्दी से कर्बला इराक के बयाबान में जालिम यजीदी फौज ने शहीद कर दिया था।

इमाम हुसैन की शहादत की याद में मोहर्रम मनाया जाता है। यह कोई त्योहार नहीं बल्कि मातम का दिन है।

शिया करते हैं मातम

शिया समुदाय के लोग 10 मोहर्रम के दिन तक काले कपड़े पहनकर खूनी मातम करते है। मातम के दौरान इमाम हुसैन को याद करते हुए अपने शरीर पर बार करते हैं। 10 मोहर्रम को आशूरा भी कहा जाता है।

10 मोहर्रम के दिन मुस्लिम समाज के लोग इमाम हुसैन की याद में बने ताजिए को कर्बला पर लेजाकर शहीद कर देते हैं। इस इस्लामी महीने में मुस्लिम सुदाय के लोग शादी- विवाह में शिरकत नहीं करते। 

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सुन्नी रखते हैं रोज़ा

वहीं मुस्लिम समाज में सुन्नी समुदाय के लोग इस इस्लामी महीने में 10 मोहर्रम के दिन तक रोज़ा रखते हैं। सुन्नी समुदाय के लोग शिया समुदाय के लोगों की तरह मातम नहीं करते।

इमाम हुसैन के साथ कर्बला में शहीद हुए लोगों को याद किया जाता है और उनकी आत्मा का शांति के लिए दुवा की जाती है। 61 हिजरी में शहीद हुए लोगों को एक तरह से यह श्रद्धांजलि देने का तरीका है।

 
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-Tags:#Muharram#Muslim
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