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विनायक चतुर्थी: इस विधि से करें विघ्नहर्ता गणेश की पूजा, दूर होंगी सभी बाधाएं

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 21 2017 3:01PM IST
विनायक चतुर्थी: इस विधि से करें विघ्नहर्ता गणेश की पूजा, दूर होंगी सभी बाधाएं

विनायक चतुर्थी अन्य सभी चतुर्थियों में खास महत्व का होता है। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश की पूजा करने से घर-परिवार की सभी विध्न-बाधाओं का नाश होता है। विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। भगवान गणेश से मनोकामनाएं पूर्ति के आशीर्वाद को वरद कहा जाता है।

इस दिन जो कोई भी भगवान गणेश की पूजा पूरे विधि-विधान से करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। साथ ही भगवान गणेश अपने भक्तों को ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की पूजा इस विधि के करना चाहिए। ज्योतिषी पंडित धनंजय पाण्डेय के अनुसार इन मंत्रों से गणेश की पूजा करनी चाहिए।

ये है भगवान गणेश की विधिवत् पूजा-मंत्र

भगवान गणेश की पूजा में इस मंत्र से उन्हें सिंदूर अर्पित करना चाहिए।

सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।

शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥

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इस मंत्र का उच्चारण कर गणेश जी को अक्षत चढ़ाना चाहिए।

अक्षताश्च सुरश्रेष्ठं कुम्कुमाक्तः सुशोभितः।

माया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरः॥

इस मंत्र से विघ्नहर्ता गणेश को दूर्वा (दूभी) अर्पण करें।

त्वं दूर्वेSमृतजन्मानि वन्दितासि सुरैरपि।

सौभाग्यं संततिं देहि सर्वकार्यकरो भव॥

गणेश जी की पूजा में इस मंत्र से उन्हें यज्ञोपवीत (जनेऊ) समर्पित करना चाहिए।

नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम्।

उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वर॥

गौरी पुत्र गणेश को पुष्प समर्पित करते समय इस मंत्र को पढ़ना चाहिए

पुष्पैर्नांनाविधेर्दिव्यै: कुमुदैरथ चम्पकै:।

पूजार्थ नीयते तुभ्यं पुष्पाणि प्रतिगृह्यतां॥

विघ्न विनायक गणेश जी को इस मंत्र से भोग लगाना चाहिए

शर्कराघृत संयुक्तं मधुरं स्वादुचोत्तमम।

उपहार समायुक्तं नैवेद्यं प्रतिगृह्यतां॥

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गणेश जी की पूजा के बाद इस मंत्र भगवान को प्रणाम करना चाहिए 

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय। 

लंबोदराय सकलाय जगध्दिताय॥

नागाननाय श्रुतियग्यविभुसिताय।

गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥  

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