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वास्तु शास्त्र: घर की इस दिशा में किचन, बनाते हैं पराई स्त्रियों से अनैतिक संबंध

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 18 2017 3:09PM IST
वास्तु शास्त्र: घर की इस दिशा में किचन, बनाते हैं पराई स्त्रियों से अनैतिक संबंध

वास्तु शास्त्र प्राचीनतम विद्याओं में से एक है। घर बनवाने की बात हो या फिर मरम्मत की सभी में लोग वास्तु के नियम का ही सहारा लेते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार जब घर का किचन होता है तो घर में साक्षात् लक्ष्मी का वास होता है।

आज हम आपको किचन से जुड़ी कुछ विशेष बातें बता रहे हैं। घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किचन होता है। किचन में धन की देवी लक्ष्मी का वास होता है।

आग्नेय कोण

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का किचन आग्नेय कोण में होना सर्वोत्तम माना गया है। इस कोण में रसोईघर होने से घर की महिलाओं का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और वे मानसिक तौर पर शांत रहती हैं। इसके अलावे घर में खुशयां बनी रहती है।

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दक्षिण दिशा में 

अगर घर के दक्षिण दिशा में किचन है तो इससे घर के लोगों को मानसिक रूप से अशांति होती है। इसके अलावा घर के मालिक को बहुत क्रोध आता है और उसका स्वास्थ्य भी सही नहीं रहता है।

वायव्य कोण (उत्तर और पश्चिम का कोण)

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वास्तु शास्त्र के अनुसार वायव्य कोण में घर का किचन होना अशुभ फलदायक माना गया है। जिस घर के वायव्य कोण में रसोईघर स्थित होता है उस घर के मालिक का चरित्र स्वच्छ नहीं होता हैं। उसकी कई महिला मित्र होती हैं और वो अपनी पत्नी के प्रति वफादार नहीं होता है।

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