Breaking News
Top

इस प्रकार शुरू हुई एकादशी व्रत, ये है महत्व

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 11 2017 4:08PM IST
इस प्रकार शुरू हुई एकादशी व्रत, ये है महत्व

उत्पन्ना एकादशी सभी 24 एकादशियों विशेष महत्व का है। यह एकादशी व्रत मार्गशीष में शुक्लपक्ष की एकदशी को रखी जाती है। विष्णु पुराण के अनुसार इस एकादशी से ही एकादशी व्रत का प्रारंभ हुआ था। उत्पन्ना एकादशी के व्रत का महत्व इस दृष्टि से भी और अधिक है कि इस दिन को ही भगवान विष्णु के शरीर से एक देवी की उत्पत्ति हुई जिसका नाम एकादशी पड़ा।

इसे भी पढ़ें: उत्पन्ना एकादशी: शुभ मुहूर्त और महत्व

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा 

विष्णु पुराण में कथा है कि मुर नामक एक असुर था जिसने देवलोक में भयानक तबाही मचा रखी थी। सभी देवता गण विष्णु के पास गए और राक्षस से बचाव करने को कहा। जिसके बाद विष्णु युद्ध करते हुए थक गए और बद्रीनाथ आश्रम के गुफा में जाकर विश्राम करने लगे।

असुर मुर भगवान विष्णु का पीछा करते हुए इनके पास पहुँच गया। निद्रा में लीन भगवान विष्णु नी इस असुर को मारना चाहा तभी इसके शरीर से एक देवी की उत्पत्ति हुई जिसने इस असुर का वध किया। जिसके बाद भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर इस देवी से कहा कि तुम्हारी उत्पत्ति मार्गशीर्ष एकादशी तिथि को हुई है इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा। साथ ही आज से ही प्रत्येक एकादशी को मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा होगी।

इसे भी पढ़ें: तुलसी विवाह महत्व 

कहते हैं कि तभी से एकादशी का व्रत किया जाता है और भगवान विष्णु के साथ इनकी पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को विधि पूर्वक करने से मोहमाया से मुक्त हो जाता है। व्रत के पुण्य से व्यक्ति स्वर्ग लोक में स्थान पाने योग्य हो जाता है।

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )
मुख्य खबरें
Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo