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शिक्षक दिवस और सर्वपल्ली राधाकृष्णन

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 5 2017 11:50AM IST
शिक्षक दिवस और सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर, 1888 को तमिलनाडु के छोटे से गांव तिरुमनी में ब्राह्मण परिवार मे हुआ था। पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी गरीब थे पर एक विद्वान ब्राम्हण थे।

 
परिवार की सम्पूर्ण जिम्मेदारी पिता पर होने के कारण राधाकृष्णन को बचपन से ही ज्यादा सुख-सुविधा नहीं मिली। इनका बचपन तिरुमनी गांव मे ही व्यतीत हुआ और यहीं से शिक्षा प्रारंभ हुई। 
 
1896 में पिता ने उनका दाखिला क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल (तिरुपति) में करा दिया। यहां उन्होंने पांच साल तक पढ़ाई की। डॉ सर्वेपल्ली राधाकृष्णन भारत के दूसरें राष्ट्रपति जिनका जन्म दिन प्रतिवर्ष 5 सितम्बर को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं।
 
इन्होने एक शिक्षक के रूप में अपने जीवन की शुरुआत की और भारत के राष्ट्रपति पद को गौरवान्वित किया। सादी जीवन शैली और उच्च विचारों के धनी डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को हम आदर्श शिक्षक के रूप में याद करते हैं। डॉ राधाकृष्णन विवेकानंद और वीर सावरकर को अपना आदर्श मानते थे। इनके बारे मे इन्होंने गहन अध्ययन कर रखा था।
 
जब भारत को स्वतंत्रता मिली उस समय जवाहरलाल नेहरू ने राधाकृष्णन से आग्रह किया कि वह विशिष्ट राजदूत के रूप में सोवियत संघ के साथ राजनयिक कार्यों की पूर्ति करें। नेहरूजी की बात को स्वीकारते हुए उन्होंने 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य के रूप मे कार्य किया।
 
संसद मे सभी लोग उनके कार्य और व्यवहार की भूरि-भूरि प्रंशसा करते थे। 13 मई 1952 से 13 मई 1962 तक वे देश के उपराष्ट्रपति रहे। 13 मई 1962 को ही वे भारत के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। 
शिक्षा और राजनीति में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए राधाकृष्णन को सर्वोच्च अलंकरण “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया। 1962 मे उन्हें “ब्रिटिश एकेडमी” का सदस्य बनाया गया। पोप जॉन पाल ने “गोल्डन स्पर” भेट किया। ब्रिटिश सरकार से “आर्डर ऑफ़ मेरिट” का सम्मान प्राप्त हुआ। 
 
1967 के गणतंत्र दिवस पर राधाकृष्णन ने देश को सम्बोधित करते हुए यह स्पष्ट किया था कि वह अब किसी भी सत्र के लिए राष्ट्रपति नहीं बनना चाहेंगे और बतौर राष्ट्रपति ये उनका आखिरी भाषण रहा। 
 
17 अप्रैल 1975 को एक लम्बी बीमारी के बाद राधाकृष्णन का निधन हो गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद किया जाता है। हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाकर राधाकृष्णन के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। इस दिन देश के विख्यात और उत्कृष्ट शिक्षकों को उनके योगदान के लिए पुरस्कार दिए जाते हैं। 
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