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क्या आप भी करते हैं प्रवचन में जाने के बाद ये काम, तो हो जाएं सावधान

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 6 2017 9:00AM IST
क्या आप भी करते हैं प्रवचन में जाने के बाद ये काम, तो हो जाएं सावधान

धर्ममुनि महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा है कि सत्संग सिर्फ सुनने के लिए नहीं होता बल्कि उससे सीख लेना चाहिए। सत्संग में आने और प्रवचन सुनने के बाद हम फिर राग, द्वेष में लिप्त हो गए तो हमारा सत्संग में जाना व्यर्थ है।

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सत्संग में जाने वाला प्रत्येक व्यक्ति अगर एक-एक बुराई का भी त्याग कर दे तो एक दिन सारी बुराइयां दूर हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि संत किसी से एक रुपया भी नहीं लेते।

वे तो केवल पेट के लिए भोजन लेते हैं। वे भी घर-घर जाकर उदर पूर्ति के लिए लेते हैं। अगर उन्हें देना ही है तो अपनी बुराईयों काे त्याग कर अपना समर्पण दें।

उन्होंने कहा कि जहां भी प्रवचन होते हैं वहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं वे अगर अपने अंदर व्याप्त एक-एक बुराई को भी छोड़ने का संकल्प ले लें तो ये समाज कितना सुंदर व निर्मल बन जाएगा।

प्रवचन के दौरान सुनी गई बातों का थोड़ा अंश भी प्राणी के अंदर रह जाए तो उसकी कायापलट हो सकती है। जैन संत ने कहा कि माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपनी संतान को धर्म मार्ग पर चलाएं।

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साधु संतों के दर्शन करने आते समय बच्चों को साथ लेकर आएं, ताकि वे धर्म की राह पकड़ सकें। वर्तमान में काफी घरों के बच्चे दु‌र्व्यसनों में लिप्त हो गये हैं। मां-बाप व कुल की इज्जत से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।

ऐसे बच्चों का जीवन भोगों में जाता है तथा नरक गति में चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि घर में बच्चों को अच्छे संस्कार दें, ताकि वे गलत मार्ग पर न चलें। पैसा तो आने-जाने वाली चीज है। संस्कार हमेशा प्राणी के साथ रहते हैं।

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-Tags:#Importance of Life#Your Life#Thoughts of Saints
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