Breaking News
Top

यही है भगवान 'शिव' को जल्द प्रसन्न करने का प्रभावशाली मंत्र, मंत्र जाप से असाध्य रोग भी होते हैं दूर

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 6 2017 4:14PM IST
यही है भगवान 'शिव' को जल्द प्रसन्न करने का प्रभावशाली मंत्र, मंत्र जाप से असाध्य रोग भी होते हैं दूर

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव अपने भक्तों पर सभी देवों में सबसे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। भक्तों की पूजा-अर्चना से शीघ्र प्रसन्न होने के कारण ही इन्हें देवाधिदेव कहा जाता है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी को भी अधिक मेहनत नहीं करना पड़ता है।

शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि महादेव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से सभी शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं। इस मंत्र को विधि-विधान से जाप करना ही श्रेयस्कर माना जाता है। शिव के इस मंत्र की शक्ति का लगाना मुश्किल है।

इसे भी पढ़ें: 9 नवंबर को बन रहा है शक्तिशाली 'गुरु-पुष्य' योग, राशि के अनुसार करें ये उपाय, मिलेगा हर समस्या का समाधान

इसलिए कहा जाता है कि इस मंत्र के जाप से शिव भक्त की सारी चिंताएं दूर कर देते हैं। इस मंत्र को जप करने वाला हमेशा सफलता की ऊंचाइयों को छूता है। इसके अलावे शिव के इस मंत्र से लम्बी आयु का भी वरदान मिलता है।

इन समस्याओं का होता है समाधान 

अच्छे स्वास्थ्य के लिए महादेव के इस एकाक्षरी मंत्र का जाप बहुत लाभदायक होता है। यह मंत्र है 'हौं'। सुबह-सवेरे इस मंत्र का जाप करना बेहतर होता है।

छोटी-छटी बीमारियों के लिए 

यदि आप छोटी-छोटी बीमारियों से परेशान हैं तो महादेव के तीन अक्षर के इस मंत्र का जाप विशेष लाभकारी सिद्ध होगा। इस मंत्र का रात को सोने से पहले जाप करना अच्छा माना जाता है। यह त्रयक्षरी महामृत्युंजय मंत्र- 'ऊं जूं स:' है। वैसे तो इस मंत्र का 108 बार जाप करना अच्छा माना गया है लेकिन यदि इतना संभव नहीं हो तो कम से कम 27 बार तो अवश्य करना चाहिए। इस मंत्र का इत्म प्रभाव है कि आपको कोई भी बीमारी परेशान नहीं करेगी।

दुर्घटना निवारण के लिए

महादेव के इस चार अक्षरों का ये मंत्र बड़ी से बड़ी दुर्घटना के लिए लाभकारी होता है। इसके अलावे इस मंत्र का जाप सर्जरी के के प्रभाव को कम करने के लिए किया जाता है। सभी प्रकार की दुर्घटना से बचने के सुबह शिव जी को जल अर्पण कर इस मंत्र का कम से कम तीन माला जाप करना चाहिए। मंत्र है 'ऊं हौं जूं स:'

आयु वृद्धि और स्वास्थ्य की समस्या के लिए 

दस अक्षर वाला महामृत्युंजय मंत्र 'ऊं जूं स: माम पालय पालय' को अमृत मृत्युंजय मंत्र के नाम से जाना जाता है। जिसके लिए इस मंत्र का जप करना है उसका नाम इस मंत्र के शुरू में लगाना चाहिए। जिसे भी आयु से संबंधित समस्या है उसके लिए इस मंत्र का जाप बहुत प्रभावशाली सिद्ध होता है। इसके लिए सबसे पहले तांबे के कलश में जल भरना चाहिए। फिर उस तांबे के कलश के सामने इस मंत्र का जाप करें और जाप की समाप्ति पर शिव का ध्यान करते हुए इस जल को पिलाएं।

इसे भी पढ़ें: गुरु-पुष्य योग: इस विशेष दिन को बना 'गुरु-पुष्य' शक्तिशाली योग, शनि की दशा को भी करेगा इस तरह प्रभावित

मृत संजीवनी महामंत्युंजय मंत्र-

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः

ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्‍धनान्

मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्

ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

ज्योतिषी पंडित धनंजय पाण्डेय के अनुसार इसं मंत्रों के विधि पूर्वक जाप से असाध्य रोग भी दूर हो जाता है।

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )
मुख्य खबरें
Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo