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शरद पूर्णिमा : ऐसे करें व्रत, माता लक्ष्मी करेंगी धनवर्षा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 5 2017 6:06PM IST
शरद पूर्णिमा : ऐसे करें व्रत, माता लक्ष्मी करेंगी धनवर्षा

Sharad Purnima : Eshe Karen Vart, Mata Lakshmi Karengi Dhanvarsha

शरद पूर्णिमा पूजा आश्व‍िन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। शरद पूर्णिमा को कोजागरा भी कहते हैं। शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसलिए शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है।

  • ये है पूजा विधि 
इस दिन श्रीसूक्त, लक्ष्मीस्तोत्र का पाठ करके हवन करना चाहिए। इस विधि से कोजागरा व्रत करने से माता लक्ष्मी भक्तों पर विशेष खुश होती हैं। साथ ही धन-धन्य, सुख-समृद्धि को बढाकर सारे सुखों को प्रदान करती हैं।
  • शरद पूर्णिमा व्रत कथा
कथा के अनुसार एक साहूकार की दो बेटियां थी। दोनों बेटियां पूर्णिमा को व्रत रखती थी, बड़ी बेटी तो विधि-विधान से व्रत पूरी की। लेकिन छोटी बेटी ने व्रत को अधूरा ही छोड़ दिया। तब छोटी बेटी के बच्चे जन्म लेते ही मर जाते थे। एक दिन बड़ी बेटी के छूने से उसका बालक जीवित हो गया। उसी दिन से यह व्रत विधि पूर्वक मनाया जाने लगा।
  • इसलिए लगाया जाता है खीर का भोग
मान्यता के अनुसार पूर्णिमा की रात को अमृत की वर्षा होती है। इसलिए इस दिन आसमान के नीचे खीर को बनाकर रखा जाता है। रात में खीर बनाकर उसे रात में आसमान के नीचे रख दें ताकि चंद्रमा का प्रकाश खीर पर पड़े। दूसरे दिन सुबह स्नान करके खीर का भोग अपने घर के मंदिर में लगाएं। इस प्रसाद को कहने सभी प्रकार के रोगों से छुटकारा मिलता है।
 
  • शरद पूर्णिमा का वैज्ञानिक कारण
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा धरती के बेहद करीब होता है। इसलिए चंद्रमा के प्रकाश में मौजूद रासायनिक तत्व सीधे-सीधे धरती पर आते हैं। खाने-पीने की चीजें खुले आसमान के नीचे रखने से चंद्रमा की किरणे सीधे उन पर पड़ती है। जिस कारण विशेष पुषक तत्त्व खाने-पीने की वस्तुओं में मिल जाती है। जो हमारी सेहत के लिए अनुकूल होते हैं।
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