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शनिवार विशेष: शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या आपकी मुट्ठी में, बस शनिवार को कर लें मात्र 2 उपाय

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 4 2017 12:17PM IST
शनिवार विशेष: शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या आपकी मुट्ठी में, बस शनिवार को कर लें मात्र 2 उपाय

शनि देव साढ़ेसाती और ढैय्या के समय ही जातक को उसके कर्मों का फल देते हैं। यह समय क्रमशः साढ़े सात साल और ढाई साल का होता है। शनि के इस प्रभाव के काल क्रम में जातक शनिदेव जातक के उन्नति की राह में आकर खड़े हो जाते हैं जिस कारण सभी कार्य रुकने लगते हैं।

लेकिन शनि की क्रूर दृष्टि से बचने के लिए शनिवार को किया गया यह उपाय रामबाण साबित होता है। इसके लिए आपको केवल शनिवार को यह उपाय करना शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से बचाएगा। ये उपाय न केवल शनि के प्रकोप के लिए कवच बनकर आपकी रक्षा करता है बल्कि शुभ फल दायक भी साबित होता है। शनि का यह उपाय बिल्कुल सरल है जिसे कोई भी आसानी से कर सकता है। 

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शनि का बीज मंत्र 

सबसे पहला उपाय शनि के बीज मंत्र का जाप करना है। यह बीज मंत्र है 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः'। शनि के इस बीज मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। यह मंत्र जाप शनिवार को विशेष लाभकर होता है। यह मंत्र कवच की तरह शनि की क्रूरता से आपकी रक्षा करेगा।

शनि स्तोत्र 

इसके बाद शनि के स्तोत्र का पाठ करना अच्छा होता है। यह स्तोत्र है 'नमस्ते कोण संस्थाय पिंगलाय नमोस्तुते। नमस्ते विष्णु रूपाय कृष्णाय च नमोस्तुते।। नमस्ते रौद्र देहाय नमस्ते कालकायजे। नमस्ते यम संज्ञाय शनैश्चर नमोस्तुते। प्रसादं कुरु देवेश दीनस्य प्रणतस्य च।

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शनि के इस स्तोत्र का पाठ करने से शनि के सभी दोषों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इससे बेहतर कोई स्तोत्र नहीं है। इस स्तोत्र का कम से कम 11 बार पाठ करना चाहिए। 

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