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संकष्टी चतुर्थी 2017: व्रत और पूजा विधि

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Dec 7 2017 12:35PM IST
संकष्टी चतुर्थी 2017: व्रत और पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित है। इस चतुर्थी को संकटहारा चतुर्थी भी कहा जाता है। क्योंकि यह चतुर्थी जीवन में सभी संकटों को मुक्त करने वाली मानी गई है। संकष्टी चतुर्थी के इस व्रत को करने वाले का हर संकट दूर हो जाता है।

इस बार यह संकष्टी चतुर्थी 8 दिसंबर (शुक्रवार) को पड़ रही है। पुराणों के अनुसार भगवान गणेश को शिव का यह वरदान है कि जो कोई भी संकट चतुर्थी के दिन उनकी पूजा-अराधना करेगा, उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। इस दिन को भगवान गणेश का जन्म दिवस भी माना जाता है।

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व्रत और पूजा विधि 

इस दिन व्रत करने के लिए सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करें। स्नान के दौरान भगवान गणेश के सभी नामों का जाप करें। फिर स्वच्छ वस्त्र पहनकर गणेशजी की प्रतिमा की विधिपूर्वक पूजा करें। घर में यह पूजा ना कर सकें तो आप मंदिर जाकर भी कर सकते हैं। पूजा से पूर्व प्रसाद में चढ़ाने के लिए खीर, हलवा आदि कोई मीठा प्रसाद भी अवश्य तैयार करें, इसके साथ ही दुर्वा चढ़ाना ना भूलें।

पूजा पूर्ण होने के बाद व्रत का संकल्प लेकर पूरे दिन का उपवास रखें। संध्याकाल में चांद के उदय होने के समय में गणेश जी की प्रतिमा की एक बार फिर पूरे विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद चांद देखकर व्रत तोड़ें।

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जो व्रत ना भी कर रहे हों उनके लिए भी इस दिन चांद देखना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति के सभी रोग-शोक दूर होते हैं और वह जीवन में हमेशा सफल होता है। इस दिन भागवत का पाठ करना भी बेहद सौभाग्यवर्धक माना गया है।

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