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ऐसे करें राधा जन्माष्टमी व्रत, पूरी होगी सभी मनोकामनाएं

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 29 2017 9:45AM IST
ऐसे करें राधा जन्माष्टमी व्रत, पूरी होगी सभी मनोकामनाएं

भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को श्रीकृष्ण की बाल सखा भगवती राधाजी का जन्म हुआ था। इस साल राधा जन्माष्टमी 29 अगस्त को है। यदि श्रीकृष्ण के साथ से राधा को हटा दिया जाए तो श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व माधुर्यहीन हो जाएगा। राधा के कारण ही श्रीकृष्ण रासेश्वर के रूप में जाना जाता है।

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राधाजी का जन्म बरसाना में हुआ था। पद्मपुराण के अनुसार उनके पिता का नाम वृषभानु था। वृषभानु यज्ञ के लिए भूमि साफ कर रहे थे, तभी उन्हें कन्या के रूप में राधाजी प्राप्त हुईं।
 
कहा जाता है कि जो लोग राधा जन्माष्टमी का व्रत नहीं रखते, उन लोगों का कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत का फल भी नहीं मिलता। राधा जन्माष्टमी का व्रत भी जोड़े से करने का लाभ श्रद्धालुओं को मिलता है। इस व्रत पर राधा-कृष्णा की प्रतिमा को लगाकर पूजा करना चाहिए।
 
राधा अष्टमी या जन्माष्टमी के नाम से इस व्रत को जाना जाता है। इस व्रत को करने से धन की कमी नहीं होती और घर में बरकत बनी रहती है। 
ऐसे करें राधाष्टमी व्रत-
सुबह-सुबह स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
 
इसके बाद मंडप के नीचे मंडल बनाकर उसके मध्यभाग में मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें. कलश पर तांबे का पात्र रखें.
 
अब इस पात्र पर वस्त्राभूषण से सुसज्जित राधाजी की सोने (संभव हो तो) की मूर्ति स्थापित करें.
 
इसके बाद राधाजी का षोडशोपचार से पूजन करें।
 
ध्यान रहे कि पूजा का समय ठीक मध्याह्न का होना चाहिए।
 
पूजन पश्चात पूरा उपवास करें अथवा एक समय भोजन करें।
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