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पितृपक्ष सर्वपितृ अमावस्या: पितृ दोष से हमेशा के लिए मिल जाएगी मुक्ति

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 18 2017 7:00PM IST
पितृपक्ष सर्वपितृ अमावस्या: पितृ दोष से हमेशा के लिए मिल जाएगी मुक्ति

सर्वपितृ अमावस्या यानि श्राद्ध-पक्ष के आखिरी दिन किया गया श्राद्ध होता है। इस श्राद्ध कर्म के द्वारा हर प्रकार के पितृदोषों से मुक्ति मिलती है। सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखने से आपको पूरा फल मिलता है। साथ ही आप हमेशा पितृ दोष से मुक्त हो जाते हैं।

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  • संकल्प सामग्री-

श्राद्ध कर्म शुरू करने से पहले ये ध्यान रखें कि हाथ में जल के साथ अक्षत, चंदन, फूल और तिल अवश्य हो। इन वस्तुओं के साथ ही संकल्प करना चाहिए। ऐसा ना करने से श्राद्ध कर्म अपूर्ण माना जाता है।

  • ताजा और पवित्र वस्तु-

किसी भी श्राद्ध कर्म में चना, मसूर, उड़द, कुलथी, सत्तू, मूली, काला जीरा, कचनार, खीरा, काला नमक, काला उड़द, बासी या अपवित्र फल या अन्न उपयोग नहीं किया जाता है। इसका ध्यान रखते हुए ही दान या गरीबों-ब्राह्मणों को भोजन कराने के लिए वस्तुओं को चुनना चाहिए।

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  • भोज्य पदार्थ-

श्राद्ध कर्म के दौरान ब्राहमण भोजन में पितरों के पसंदीदा भोज्य पदार्थ को खिलाना अच्छा माना जाता है। लेकिन हर श्राद्ध में दूध, दही, घी और शहद का उपयोग पितृदोष से हमेशा के लिए मुक्त करने वाला माना गया है। संभव हो तो इनके इस्तेमाल से खीर बनाएं और  श्राद्ध कर्म में उपयोग करते हुए ब्राह्मणों।

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  • तर्पण-

श्रद्ध कर्म में सबसे महत्वपूर्ण तर्पण को माना गया है। इसलिए इसमें सादे जल की बजाय दूध, तिल, कुश और फूल का भी अवश्य उपयोग करें। दूध के रूप में गाय के दूध का उपयोग ही करना चाहिए।

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  • दान और भोजन-

श्राद्धपक्ष में पितरों की शंति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ब्राह्मणों तथा गरीबों को भोजन कराने का खास विधान है। श्राद्ध के बाद आवश्यक रूप से ऐसा किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगर कोई श्राद्ध कर्म ना कर सके और केवल दान या भोजन करा दे तो भी वह पितृदोषों से मुक्त हो जाता है।

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