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पितृपक्ष 2017: इन पशु-पक्षियों को भोजन कराने का ये है महत्व

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 8 2017 10:54AM IST
पितृपक्ष 2017: इन पशु-पक्षियों को भोजन कराने का ये है महत्व

पितृपक्ष ही ऐसा अवसर होता है जिसमें हमारे पितर धरती पर आकर हमें आशीर्वाद देते हैं। पितरों को हमारे पास आने का माध्यम पशु-पक्षी है। जिन जीवों और पशु-पक्षियों के माध्यम से पितर आहार ग्रहण करते हैं वो हैं - गाय, कुत्ता, कौवा और चींटी।

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श्राद्ध के समय इनके लिए भी आहार का एक भाग निकाला जाता है, तभी श्राद्ध कर्म पूरा होता है। श्राद्ध करते समय पितरों को अर्पित करने वाले भोजन के पांच अंश निकाले जाते हैं- गाय, कुत्ता, चींटी, कौवा और देवताओं के लिए। इन पांच अंशों का अर्पण करने को पंच बलि कहा जाता है। 

सबसे पहले भोजन की तीन आहुति कंडा जलाकर दी जाती है। श्राद्ध कर्म में भोजन के पहले पांच जगह पर अलग-अलग भोजन का थोड़ा-थोड़ा अंश निकाला जाता है। गाय, कुत्ता, चींटी और देवताओं के लिए पत्ते पर और कौवे के लिए जमीन पर अंश रखा जाता है। फिर प्रार्थना की जाती है कि इनके माध्यम से हमारे पितर प्रसन्न हों।

पांच तत्व-

कुत्ता जल तत्त्व का प्रतीक है, चींटी अग्नि तत्व का, कौवा वायु तत्व का, गाय पृथ्वी तत्व का और देवता आकाश तत्व का। इस प्रकार इन पांचों को आहार देकर हम पंच तत्वों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

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केवल गाय में ही एक साथ पांच तत्व पाए जाते हैं इसलिए पितृपक्ष में गाय की सेवा विशेष फलदायक होता है। मात्र गाय को चारा खिलने और सेवा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और श्राद्ध कर्म पूरा माना जाता है। 

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