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पौष पूर्णिमा 2018: इस शुभ मुहूर्त में करें स्नान-पूजा, जन्म-जन्मांतर के पापों से मिलेगी मुक्ति

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jan 2 2018 12:40PM IST
पौष पूर्णिमा 2018: इस शुभ मुहूर्त में करें स्नान-पूजा, जन्म-जन्मांतर के पापों से मिलेगी मुक्ति

पौष पूर्णिमा यानि पौष मास का अंतिम पूर्णिमा होता है। शस्त्रों के अनुसार इस दिन महास्नान का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। पौष पूर्णिमा के दिन संपूर्ण भारत में लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।

पौष मास को सूर्य देव का भी मास माना जाता है। इस साल के पौष पूर्णिमा के दिन सूर्य और चंद्रमा का अद्भुत संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार सूर्य और चंद्रमा का ऐसा शुभ संयोग पौष पूर्णिमा को ही बनता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव और चन्द्र की आराधना से सभी मनोकामना पूरी होती है।

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2018 में पौष-पूर्णिमा 

साल 2018 के पौष मास की पूर्णिमा का प्रारंभ पंचांग के अनुसार 2 जनवरी (मंगलवार) को हो रहा है। इस पूर्णिमा के उपरांत ही पवित्र माह माघ का आगाज हो जाएगा। इस पूर्णिमा को पवित्र नदी में स्नान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। 

पौष पूर्णिमा तिथि और शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि आरंभ - 11:44 बजे से ( 01 जनवरी 2018 )

पूर्णिमा तिथि समाप्त - 7:53 बजे (02 जनवरी 2018 

पौष पूर्णिमा: ये है महत्व 

शास्त्रों में पूर्णिमा को पूर्ण मास के रूप में भे देखा गया है। यानि जिस दिन चंद्रमा का आकार पूर्ण होता है, अर्थात पूरा गोल होता है, वह दिन पूर्णिमा के तौर पर जाना जाता है। सभी पूर्णिमाओं में पौष मास का पूर्णिमा अत्यधिक महत्व का माना जाता है। पौष मास का यह पूर्णिमा उत्तर भारत में और भी अधिक महत्त्व का माना गया है। पौष की पूर्णिमा को मोक्ष की कामना के लिए बेहद शुभ माना गया है।

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इस पूर्णिमा के बाद ही पवित्र मास माघ मास की शुरुआत हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास में किए जाने वाले स्नान की शुरुआत इसी पूर्णिमा के बाद हो जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन विधिपूर्वक प्रात:काल स्नान करता है वह मोक्ष का अधिकारी होता है। उसे जन्म-मृत्यु के चक्कर से छुटकारा मिल जाता है, यानि मुक्ति मिल जाती है।

चूंकि माघ माह को बहुत ही शुभ है इसलिए इसके प्रत्येक दिन को मंगलकारी माना जाता है। इसके अलावे इस दिन को जो भी कार्य आरंभ किए जाते हैं वे सफल होते हैं। इस दिन स्नान के पश्चात क्षमता अनुसार दान करने का भी महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि मृत्युलोक में जिन्हें स्वर्गप्राप्ति की इच्छा है, उन्हें माघ के पूरे महीने में नदियों में स्नान करना चाहिए।

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