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पाप कर्मों से चाहते हैं मुक्ति, तो करें ये काम

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 6 2017 8:45AM IST
पाप कर्मों से चाहते हैं मुक्ति, तो करें ये काम

जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि इंसान को पाप कर्मों से बचने के लिए सत्संग की शरण लेनी चाहिए।कीचड़ में पैदा होने वाला कमल हमेशा बेदाग व ऊंचा ही रहता है।

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पाप कर्म करने वाला भी धर्म की शरण लेकर भवसागर पार कर सकता है। जैन संत ने कहा हम अभी तक संसार में बसे हैं और पाप से बंधे हैं और चिपके हैं, जब तक पाप से दूर नहीं हटेंगें, तब तक धर्म को स्वीकार नहीं कर सकेंगे। यदि संसार से विमुक्त होना चाहते हो तो पाप से दूर होना पड़ेगा।

उन्होंने कहा काम भोग मनुष्य को सुख भी देते हैं और दुख भी देते हैं। सुख तो क्षणिक होता है, लेकिन दुख लंबे समय तक भोगते हैं। इस पाप का आकर्षण आयु विशेष से संबधित नहीं होते।
 
यह वासना तो किसी भी उम्र में जागृत हो सकती है। पाप का बीज जब छोटा रहता है उसे तभी नष्ट कर देने में ही भलाई है, अन्यथा व बीज वृक्ष का रूप ले लेता है और बाद में चिंता व नाश का कारण बन जाता है।

 
पाप पहले मनुष्य को फिर परिवार को, समाज को, मोहल्ले को, शहर को और फिर देश को बर्बाद कर देता है। पापी व्यक्ति से कभी भी मित्रता नहीं करना चाहिए क्योंकि हम जिस प्रकार की संगत करते हैं वैसे ही बनने लगते हैं। इंसान को पाप कर्मों से बचने के लिए सत्संग की शरण लेनी चाहिए। 
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paap se mukti pane ka tarika

-Tags:#Sin Of Life#About of God#Life#Spiritual Story
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