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देवी के छठे स्वरुप की इस मंत्र से करें पूजा, जिनकी शादी ना हो रही हो जरूर पढ़ें

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 26 2017 8:05AM IST
देवी के छठे स्वरुप की इस मंत्र से करें पूजा, जिनकी शादी ना हो रही हो जरूर पढ़ें

नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर माता नें उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए देवी के छठे स्वरुप का नाम कात्यायनी पड़ा। 

माता कात्यायनी की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। देवी कात्यायनी की पूजा करने से विवाह के योग भी बनते हैं। ज्योतिष शास्त्री पंडित धनंजय पाण्डेय के अनुसार इस प्रकार माता की पूजा करनी चाहिए।

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  • मंत्र-

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता:।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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  • ध्यान मंत्र-

चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी।।

  • अर्थ- जिनका स्वरुप चन्द्रमा के समान कान्ति देने वाला है और जिनका वाहन सिंह है। ऐसी माता कात्यायनी हमारी सभी बाधा को दूर कर शुभ फल देती हैं। 

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