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नौ शक्तिपीठों में प्रमुख है ये पीठ, दर्शन मात्र से शुद्ध होती है आत्मा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 21 2017 6:47PM IST
नौ शक्तिपीठों में प्रमुख है ये पीठ, दर्शन मात्र से शुद्ध होती है आत्मा

नवरात्रि 2017

नवरात्रि को शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है। नवरात्रि में शक्तिपीठों की पूजा का विशेष महत्व है। मुख्य रूप से नौ शक्तिपीठ ही हैं, जहां नवरात्रि में पूजा करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इन नौ शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ है कोलकाता की कालीघाट शक्तिपीठ, जहां पर आज भी  माता के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु जाते हैं।

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मान्यता है कि रजा दक्ष ने एक अपने दामाद भगवान शिव के अपमान के लिए एक यज्ञ किया। यह बात शिव जी की पत्नी और रजा दक्ष की पुत्री माता सती को अच्छी नहीं लगी। सती ने रजा दक्ष द्वारा किए गए हवन की अग्नि में समाकर सती हो गई। भगवान शिव बहुत क्रोधित हुए और सती के जले हुए शरीर को लेकर इधर-उधर भटकने लगे।

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भगवान शिव के क्रोध में आने से उनका तीसरा नेत्र खुल गया। जिसके बाद सारे संसार में प्रलय आ गया। प्रलय को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को छिन्न-भिन्न कर दिया। जिससे सती के शरीर के नौ अंग जहां-जहां भी गिरे वह जगह शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।

ये अत्यंय पावन तीर्थ स्थान है जिनके दर्शन मात्र से कल्याण होता है। इसी शक्ति पीठ में कोलकाता का कालीघाट है मान्यता के अनुसार सती के दाएं पैर की चार उंगलियां गिरी थी। मां कलिका का यह मंदिर तंत्र-शक्ति साधना के लिए काफी प्रसिद्ध है।  नवरात्रि में यहां देश के कोने-कोने से तांत्रिक तंत्र साधना के लिए आते हैं। कहा जाता है कि यहां पर तंत्र साधना सफल होती है।

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