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नवरात्रि 2017:माता कालरात्रि को करें इस तरह खुश, सभी ग्रह दोषों से मिलेगी मुक्ति

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 27 2017 10:49AM IST
नवरात्रि 2017:माता कालरात्रि को करें इस तरह खुश, सभी ग्रह दोषों से मिलेगी मुक्ति

नवरात्रि की सप्तमी को माता दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि देवी ने असुर रक्तबीज का संहार करने के लिए इन्हें अपने तेज से उत्पन्न किया था। 

इनका स्वरूप अमावस्या के समान काला होने के कारण इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। चार भुजाओं वाली इस देवी के एक हाथ में कटार, एक में लोहे का कांटा है। अन्य दोनों हाथों में एक अभय और एक वर मुद्रा में है।

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गधे पर सवार देवी बाघ की छाल के वस्त्र भी धारण की हैं। इनका यह स्वरूप दुष्टों को भयभीत करने वाला है लेकिन उतना ही अधिक शुभ फलदायिनी माना गया है। मान्यता के अनुसार जिस पर भी देवी प्रसन्न हो जाएं उनके सभी ग्रह-दोष और कष्ट दूर हो जाते हैं। यहाँ तक कि भक्त अकाल मृत्यु से भी बच जाता है।

भोग-

माता कालरात्रि को गुड़ बेहद पसंद है, इसलिए सप्तमी की पूजा में देवी को प्रसन्न करने के लिए गुड़ का भोग या इससे बनी वस्तुएं अवश्य चढ़ाना चाहिए।

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  • माता को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र से ध्यान करें-

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

इसके बाद इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें

"ॐ ऐं ह्रीं क्रीं कालरात्रै नमः"

 
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