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नरक चतुर्दशी 2017: इसलिए की जाती है यमराज की पूजा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 17 2017 6:09PM IST
नरक चतुर्दशी 2017: इसलिए की जाती है यमराज की पूजा

नरक चतुर्दशी कार्तिक मास की चतुर्दशी को मनाई जाती है। नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। नरक चतुर्दशी को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दिन अलास्यता और बुराई को हटाकर जिंदगी में सच्चाई की रोशनी का आगमन होता है।

नरक चतुर्दशी के बारे में एक अन्य मान्यता है कि इस रात घर के बाहर दिए जलाकर रखने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु टल जाता है। एक कथा के अनुसार इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था।

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नरक चतुर्दशी मनाने के पीछे दूसरी कथा है कि रंती देव नामक एक धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था। लेकिन जब मौत का समय आया तो उनके सामने यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को देखकर राजा बोले मैंने तो कभी कोई पाप या अधर्म नहीं किया है।

फिर आप लोग मुझे ले जाने क्यों आए हैं। तब यमदूत ने कहा कि हे राजन एक बार आपके दरवाजे से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था। यह उसी पाप कर्म का फल है।‘ फिर राजा ने कहा कि मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझे एक साल का समय दें।

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राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचे और उनसे अपने पाप की मुक्ति का उपाय पूछा। फिर ऋषि बोले आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उनसे अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस तरह राजा पाप मुक्त हो गए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान मिला।

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