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नरक चतुर्दशी: जानिए क्यों मनाई जाती है और क्या है इसके पीछे की कहानी

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 18 2017 7:27AM IST
नरक चतुर्दशी: जानिए क्यों मनाई जाती है और क्या है इसके पीछे की कहानी

नरक चतुर्दशी दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है। नरक चतुर्दशी के इस दिन को यम दिवाली के रूप में भी जाना जाता है। नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन नरकासुर का नाश कृष्ण, सत्यभामा और माता कली ने किया था। नरकासुर एक अधर्मी राजा था जिसके कुकृत्यों से देवता परेशान थे।

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देवताओं ने मिलकर कृष्ण से अपनी मदद की गुहार लगाई। तब जाकर श्री कृष्ण के द्वारा नरकासुर का वध किया। नरकासुर को वरदान मिला था कि वही उसको मार सकता है जो अपनी पत्नी के साथ हो इसलिए कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाकर नरकासुर का वध किया।

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सत्यभामा के द्वारा जब नरकासुर का वध कर दिया जाता है तब पाताल से भू-देवी का आगमन होता है। भू माता कृष्ण को नरकासुर को अपना पुत्र बताकर पूरी कहानी बताती हैं। वे बताती हैं कि पूर्व काल में वराह अवतार के समय कृष्ण ने नरकासुर को भू-देवी को दिया था। जिसका वध श्री कृष्ण के हाथों ही लिखा था। इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में जाना जाता है। 

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-Tags:#Narak Chaturdashi 2017
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