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इस समय मंदिर में भोग चढ़ाना पुण्य नहीं पाप है

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 19 2017 8:59AM IST
इस समय मंदिर में भोग चढ़ाना पुण्य नहीं पाप है

जब पड़ोसी भूखा मरता हो तब मंदिर में भोग चढ़ाना पुण्य नहीं, बल्कि पाप है। जब मनुष्य दुर्बल हो, तब हवन में घी जलाना अमानवीय कर्म है जो व्यक्ति रोटी को तरस रहा हो उसके हाथ में धर्म ग्रंथ रखना उसका मजाक उड़ाना है।

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स्वामी विवेकानंद मानव धर्म को ही सर्वोपरि समझते थे। वे बेलूर में रामकृष्ण परमहंस मठ की स्थापना के लिए धन एकत्र कर रहे थे। इसके लिए जमीन पहले ही खरीदी जा चुकी थी।

उन्हीं दिनों कोलकाता में प्लेग की महामारी फैल गई। स्वामी जी ने तुरंत मठ निर्माण की योजना टाल दी और एकत्रित धनराशि से रोगियों की सेवा करने लगे।

किसी ने उनसे पूछा, अब मठ का निर्माण कैसे होगा? स्वामी जी ने कहा, इस समय मठ निर्माण से अधिक मानव सेवा की आवश्यकता है। मठ तो फिर बन सकता है, लेकिन गया हुआ मानव हाथ नहीं आएगा।

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स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि सच्ची ईशोपासना यह है कि हम अपने मानव-बंधुओं की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दें, लेकिन वर्तमान में लगभग सभी व्यक्ति इसके विपरीत कार्य कर रहे हैं।

वे तो बस अपनी खुशियां ढूंढ रहे हैं। हालांकि वे इस बात को भूल गए हैं कि जब वे औरों को खुशियां देंगे तो उन्हें अपने आप खुशियां मिल जाएंगी।

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mandir me iss samaye na lgaye bhog

-Tags:#Swami Vivekananda#Religion means#sin of life
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