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महालया : दुर्गा पूजा से पहले का महत्व

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 19 2017 6:05PM IST
महालया : दुर्गा पूजा से पहले का महत्व

महालया 2017

महालया हिंदू मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का भगवान शिव से विवाह होने के बाद जब वह अपने मायके लौटी थीं और उस आगमन के लिए खास तैयारी की गई। इस आगमन को महालया के रूप में मनाया जाता है।

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जबकि बांग्ला मान्यता के अनुसार महालया के दिन मां की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार, मां दुर्गा की आंखों को बनाते हैं जिसे चक्षुदान भी कहते हैं, जिसका मतलब है आंखें प्रदान करना। सौर आश्विन के कृष्णपक्ष का नाम महालया है। इस पक्ष के अमावस्या तिथि को ही महालया कहा जाता है।

माता दुर्गा के आगमन के इस दिन को महालया के रूप में भी मनाया जाता है। महालया के अगले दिन से मां दुर्गा के नौ दिनों की पूजा के लिए कलश स्थापना की जाती है इसके साथ ही देवी के नौ रूपों की पूजा के साथ नवरात्रि की पूजा शुरू हो जाती है।

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इस साल महालया 19 सितंबर को होगा और उसके अगले दिन से दुर्गा पूजा के लिए कलश स्थापन किया जाएगा। फिर क्रमशः माता शैलपुत्री से लेकर माता सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाएगी।

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