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भरी सभा में एक शख्स ने गौतम बुद्ध को कहा- 'तुम पाखंडी हो, लोगों को गुमराह कर रहे हो'

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 21 2017 9:00AM IST
भरी सभा में एक शख्स ने गौतम बुद्ध को कहा- 'तुम पाखंडी हो, लोगों को गुमराह कर रहे हो'

तुलसीदास जी ने बहुत सटीक कहा है कि बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय। भूतकाल के बारे में सोचने से समय के नाश के अलावा कुछ नहीं होता। गौतम बुद्ध एक गांव में उपदेश दे रहे थे।

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वहां स्वभाव से ही अतिक्रोधी एक व्यक्ति भी बैठा हुआ था। वह कुछ देर बाद अचानक ही आग- बबूला होकर बुद्ध से बोलने लगा, तुम पाखंडी हो, बड़ी-बड़ी बातें करना यही तुम्हारा काम है, तुम लोगों को भ्रमित कर रहे हो, तुम्हारी ये बातें आज के समय में कोई मायने नहीं रखतीं। ऐसे कई कटु वचन सुनकर भी बुद्ध शांत रहे।

उसकी बातों से न दुखी हुए, न ही कोई प्रतिक्रिया की, यह देखकर वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और वह और बुरा बर्ताव कर वहां से चला गया। अगले दिन जब उस व्यक्ति का क्रोध शांत हुआ तो उसे अपने बुरे व्यवहार के कारण पछतावे की आग में जलने लगा।

वह उन्हें ढूंढते हुए उसी स्थान पर पहुंचा, पर बुद्ध कहां मिलते वह तो अपने शिष्यों के साथ पास वाले एक अन्य गांव निकल चुके थे।

व्यक्ति ने बुद्ध के बारे में लोगों से पूछा और ढूंढते-ढूंढते जहां बुद्ध प्रवचन दे रहे थे वहां पहुंच गया, उन्हें देखते ही वह उनके चरणो में गिर पड़ा और बोला, मुझे क्षमा कीजिए प्रभु!

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बुद्ध ने पूछा - कौन हो भाई? तुम्हें क्या हुआ है? क्यों क्षमा मांग रहे हो? उसने कहा, क्या आप भूल गए, मैं वही हूं जिसने कल आपके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया था। मैं शर्मिन्दा हूं, मैं मेरे दुष्ट आचरण की क्षमायाचना करने आया हूं।

भगवान बुद्ध ने प्रेमपूर्वक कहा, बीता हुआ कल तो मैं वहीं छोड़कर आया गया और तुम अभी भी वहीं अटके हुए हो।

तुम्हें अपनी गलती का आभास हो गया, तुमने पश्चाताप कर लिया अब तुम निर्मल हो चुके हो, अब तुम आज में प्रवेश करो, बुरी बातें तथा बुरी घटनाएं याद करते रहने से वर्तमान और भविष्य दोनों बिगड़ते जाते हैं।

बीते हुए कल के कारण आज को मत बिगाड़ो। उस व्यक्ति का सारा बोझ उतर गया। उसने भगवान बुद्ध के चरणों में पड़कर क्रोध त्याग का तथा क्षमाशीलता का संकल्प लिया।

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