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जानिए, अर्थी में इस्तेमाल होने के बाद भी दाह संस्कार में क्यों नहीं जलाई जाती बांस की लकड़ी

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 26 2017 3:29PM IST
जानिए, अर्थी में इस्तेमाल होने के बाद भी दाह संस्कार में क्यों नहीं जलाई जाती बांस की लकड़ी

दाह संस्कार के समय में जब व्यक्ति के मृत शरीर को बांस की शैय्या पर ही रखा जाता है।

लेकिन अब सवाल ये उठता है कि जब मृत व्यक्ति को बांस की शैय्या पर लिटाया जाता है तो उसका दाह संस्कार करते समय उन्हीं बांस की लकड़ियों को इस्तेमाल में क्यों नहीं लाया जाता।

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आज आपको बताएंगे ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब के बारे में -

शास्त्रों के अनुसार, कई वृक्षों की पूजा का महत्व है जिसमें पीपल का वृक्ष मुख्य रूप से आता है।
 
ऐसा भी माना जाता है कि हमेशा सुगंध देने वाली चीजें जलानी चाहिए। लेकिन शास्त्रों में बांस की लकड़ी जलाना विशेष रूप से वर्जित है। ऐसा करने से पितृ दोष को जगाने वाला कारण माना जाता है। 
 
 
विज्ञान के अनुसार, बांस की लकड़ी में लेड और कई प्रकार की धातुएं होती हैं जो जलने के बाद अपने ऑक्साइड बनाते हैं। इससे जलने के बाद जो धुंआ निकलता है वह सांस के लिए बेहद ही हानिकारक होता है। यह व्यक्ति के लीवर में पहुंचकर कई प्रकार की समस्या उत्पन्न कर सकता है। 
 
माना जाता है कि मृत शरीर को उन्हीं लकड़ियों से जलाना चाहिए जिसके संपर्क में आग्नि जल्द से आ सके। इसलिए पतली लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है। 
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know the reason of dead body not use bamboo wood in funeral

-Tags:#After Death#Dead body#Funeral System#Hindu Rituals
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