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सावन स्पेशल में जानिए, भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 24 2017 11:50AM IST
सावन स्पेशल में जानिए, भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य

सावन का माह भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय है ये तो सभी जानते हैं। यहां तक कि मां पार्वती का विवाह, शिव की बारात, उनकी पूजा, संगत आदि के बारे में भी शिव पुराण से पता चलता है।

लेकिन शिव के बारे में अभी भी एक ऐसा रहस्य है जिसे बहुत ही कम लोग जानते हैं। शायद इसपर आपने कभी गौर नहीं किया होगा। जी हां- ये है महादेव की तीसरी आंख का रहस्य।

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क्या कभी आपने सोचा है कि भगवान शिव के ही तीन नेत्र क्यों हैं? और इस तीसरे नेत्र का इस्तेमाल शिव केवल क्रोध की अवस्था में ही करते हैं। तो चलिए आज इस रहस्य के पहलुओं से पर्दा उठाते हैं और आपको बताते हैं शिव के तीसरे नेत्र यानि तीसरी आंख के पीछे की पूरी कहानी।

माना जाता है कि भगवान शिव ही तीनों लोकों पर नजर रखते हैं। इन्हें सृष्टि में प्रलय का कारक भी कहा जाता है। शिव के तीन नेत्र इस बात का प्रतीक हैं कि यह इस संसार में व्याप्त तीनों गुण रज, तम और सत्व के जनक हैं। इनकी ही प्रेरणा से रज, तम और सत्व गुण विकसित होते हैं।
 
भगवान शिव की तीसरी आँख शिव जी का कोई अतिरिक्त अंग नहीं है बल्कि ये दिव्य दृष्टि का प्रतीक है। ये दृष्टि आत्मज्ञान के लिए बेहद ज़रूरी बताई जाती है।
 
शिव जी के पास ऐसी दिव्य दृष्टि का होना कोई अचरज की बात नहीं है। महादेव की छवि उनकी तीसरी आंख को और भी ज्यादा प्रभावशाली बनाती है।
 
 
शिव की तीसरी आंख के रहस्य में कई सारी कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन इस संदर्भ मएक ऐसी कथा प्रचलित है जिसका जिक्र अक्सर किया जाता है। यह कथा है कामदेव को तीसरी आंख से भस्म कर देने की कथा। 
 
एक समय की बात है, जब पार्वती जी ने भगवान शिव के पीछे जाकर उनकी दोनों आंखें अपनी हथेलियों से बंद कर दी। इससे सारे संसार में अंधकार छा गया क्योंकि माना जाता है कि भगवान शिव की एक आंख सूर्य है, दूसरी चंद्रमा। 
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-Tags:#Lord Shiva#Hindu Shastra#Month of Sawan#Shiv Puran
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