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जानिए महात्मा बुद्ध का एक मूल मंत्र

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 17 2017 9:37AM IST
जानिए महात्मा बुद्ध का एक मूल मंत्र

महात्मा बुद्ध ज्ञानशील होने के साथ ही साथ हर समस्या को भी सहजता से लेते थे। अपनी सहजता से ही वे लोगों को ज्ञान का प्रसार भी करते थे।

उनका मूल मंत्र था कि हकीकत को धैर्य से स्वीकारो और उसके अनुरूप ही कर्म करो यही ज्ञान है। एक बार की बात है एक स्त्री का एक ही बेटा था, वह भी मर गया।

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रोती-बिलखती वह गौतम बुद्ध के पास पहुंची और उनके पैरों में गिरकर बोली, महात्मा जी, आप किसी भी तरह मेरे लाल को जीवित कर दें। महात्मा बुद्ध ने उसके प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा, तुम शोक मत करो।

बुद्ध ने उस महिला के सच बोलने की सराहना करते हुए कहा, “मैं तुम्हारे बेटे को जीवित कर दूंगा। पर इसके लिए तुम्हें किसी ऐसे घर से भिक्षा के रूप में कुछ लाना होगा जहाँ किसी व्यक्ति की कभी मृत्यु न हुई हो।”

उस स्त्री को कुछ तसल्ली हुई और दौड़कर गाँव पहुंची। अब वह ऐसा घर खोजने लगी जहां किसी की मृत्यु न हुई हो। बहुत ढूंढा लेकिन ऐसा कोई भी घर उसे नहीं मिला, जहां किसी की मृत्यु न हुई हो।

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वह निराश होकर महात्मा बुध्द के पास आई और वस्तुस्थिति से अवगत कराया। तब बुद्ध बोले, “यह संसार-चक्र है।

यहां जो आता है, उसे एक दिन अवश्य ही जाना पड़ता है। तुम्हें इस दुःख को धैर्य से सहन करना चाहिए। महात्मा बुद्ध बोले कि ‘हकीकत को धैर्य से स्वीकारना ही सहज ज्ञान है।

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