Breaking News
Top

कहीं आपने तो इस तरह से तो नहीं किया है 'पुस्तक' का अपमान

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 17 2017 3:28PM IST
कहीं आपने तो इस तरह से तो नहीं किया है 'पुस्तक' का अपमान

इस प्रसंग के माध्यम से आपको पुस्तक और लेखक की कद्र होने लगेगी। क्योंकि इस प्रसंग के माध्यम से यह बताया गया है कि जाने-अनजाने में आप भी किताबों का अपमान कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें- इसे पढ़ने के बाद लौट आता है खोया हुआ आत्मविश्वास

जवाहरलाल नेहरू किताबों से गहरा लगाव रखते थे। वे पुस्तकें पढ़ते ही नहीं, उन्हें संभालकर बड़े प्यार से रखते थे। उनका मानना था कि पुस्तक में लेखक की आत्मा निवास करती है और पुस्तक का अपमान यानि लेखक का अपमान है।

बेतरतीब ढंग से रखी पुस्तकें देखकर उनका मूड खराब हो जाता था। एक बार नेहरू जी अपने एक दोस्त के यहां ठहरे हुए थे। जब किसी कार्यवश कुछ घंटों के लिए उनके मित्र घर से बाहर गए, तो कुछ पढ़ने के लिए नेहरू जी ने पुस्तकों की अलमारी खोली। अलमारी में किताबें इधर-उधर फेंकी हुई सी पड़ी थीं।

यह देखकर नेहरू जी को बड़ा दु:ख हुआ। एक सुंदर सी पुस्तक अलमारी के कोने में गर्द-गुबार से सनी पड़ी थी। नेहरू जी ने उस पुस्तक को उठाया, साफ किया और अपने पास रख लिया।

इसके बाद उन्होंने एक तरफ से शुरू करके पूरी अलमारी साफ की तथा बेतरतीब ढंग से रखी पुस्तकों को झाड़-पोंछकर, साफ करके यथासंभव ठीक ढंग से रख दिया। जब मेजबान वापस आए, तो उन्होंने पंडित जी का चेहरा देखकर ही समझ लिया कि दाल में कुछ काला है। नेहरू जी ने उन्हें डांटते हुए कहा,

'तुम्हें सम्मान करना नहीं आता, तो मुझे अपने यहां बुलाते ही क्यों हो? तुमने मेरा अपमान किया है। अब मैं तुम्हारे यहां कभी नहीं आऊंगा।' मेजबान गिड़गिड़ाए।
 
 
जब पंडित जी का क्रोध शांत हुआ तो वे बोले, 'जानते हो, मैंने तुम्हारी अलमारी में पुस्तकों को दुर्दशा की स्थिति में पड़ा पाया। क्या तुम नहीं जानते कि पुस्तक में लेखक की आत्मा निवास करती है? पुस्तक का अपमान लेखक का अपमान है। उम्मीद है तुम मेरा मतलब समझ गए होगे।'
 
मेजबान ने पंडित जी से क्षमा मांगी और भविष्य में पुस्तकों की कद्र करने का वादा किया।
(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )
know the interesting facts about book in hindi

-Tags:#Success In Life#Inspired Story#Get Success in Life
मुख्य खबरें
Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo